सप्तसती पर नगर से दियारे तक गूंजी जगदंबा की जय-जयकार
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ महासप्तमी के इस परम पवित्र एवं आध्यात्मिक बेला पर सारण जिला के हद में सोनपुर अनुमंडल क्षेत्र का कण-कण और कोना-कोना मां दुर्गे की असीम महिमा से आलोकित हो उठा है।
शारदीय नवरात्र के सप्तमी तिथि पर 17 अक्टूबर को सोनपुर क्षेत्र के समस्त दुर्गा मंडपों और देवालयों के पट विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार तथा पूर्ण सात्विक अनुष्ठानों के साथ भक्तों के लिए खोल दिए गए। पट के खुलते ही संपूर्ण वातावरण या देवी सर्वभूतेषु… माँ कालरात्रि नमस्तुभ्यम् के दिव्य जयकारों से गूंज उठा। माता के अलौकिक दर्शन की आकांक्षी श्रद्धालुओं की भीड़ से नगर से लेकर दियारे तक भक्ति का अनंत ज्वार उमड़ पड़ा।
अज्ञान और अंधकार का नाश करने वाली मां कालरात्रि का प्राकट्य
सप्तमी तिथि का यह पावन दिवस जगत जननी आदिशक्ति के सातवें स्वरूप, कल्याणकारी मां कालरात्रि को समर्पित है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, मां कालरात्रि का यह स्वरूप साधक के जीवन के समस्त आंतरिक अंधकार, अज्ञान, भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा को क्षणभर में विनष्ट कर देता है। मंदिरों में गूंजते घंट-घड़ियालों, शंखनाद और विशेष तांत्रिक-वैदिक मंत्रों की स्वरलहरियों ने संपूर्ण परिवेश को पूर्णतः आध्यात्मिक, प्राणवान और ऊर्जावान बना दिया है।
सोनपुर क्षेत्र के प्रमुख चौक-चौराहों और मंडपों में अल सुबह से ही साधकों और भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखी गई। मां के दर्शन के लिए आतुर श्रद्धालु पूर्ण अनुशासन और भाव-विभोर होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करते नजर आए। प्रमुख रूप से शहीद महेश्वर चौक, सोनपुर देवी स्थान एवं रजिस्ट्री बाजार, सोनपुर आदम, स्टेशन गेट एवं बरबट्टा कॉलोनी, पहाड़ी चक गांव तथा राहर दियारा चौक, पहाड़ी चक निचली सड़क एवं बाकरपुर चौक, सबलपुर दियारे के कचहरी बाजार, नया बाजार, कुम्हार टोली देवी स्थान एवं लालू प्रसाद यादव उच्च विद्यालय प्रांगण। गांव से लेकर शहर तक चहुंओर केवल और केवल माता भगवती की अनन्य भक्ति का ही रंग छाया है।
ऐतिहासिक एवं पौराणिक शक्तिपीठों में अनवरत दर्शन व आराधना
सप्तमी तिथि को विभिन्न दुर्गा मंडपों के साथ-साथ सोनपुर और उसके आसपास के ऐतिहासिक, पौराणिक एवं जागृत शक्तिपीठों में भक्तों का अनवरत तांता लगा रहा। हर कोई माता के श्रीचरणों में शीश झुकाकर अपने लोक और परलोक की मंगलकामना कर रहा था।
सोनपुर के काली घाट स्थित बिहार के इकलौते दक्षिणेश्वरी काली मंदिर के अलावा प्रसिद्ध हरिहरनाथ मंदिर परिसर स्थित देवी दुर्गा व देवी पार्वती मंदिर, सबलपुर क्षेत्र के स्थानीय देवी मंदिर एवं आध्यात्मिक केंद्र शिव शक्ति गोरखाई नाथ मंदिर, नयागांव डुमरी बुजुर्ग स्थित देवी कालरात्रि मंदिर, शीतलपुर बाबू टोला स्थित मनाईन माई मंदिर, दिघवारा बुजुर्ग स्थित महिषासुर मर्दिनी (नकटी देवी) मंदिर, शक्तिपीठ आमी के पौराणिक आमी अंबिका भवानी मंदिर आदि सभी पावन स्थलों पर श्रद्धालुओं की अंतहीन कतारें माता के दर्शन हेतु डटी रही।
इसके अलावा सोनपुर के सिद्ध आप रूपी गौरी-शंकर मंदिर तथा उमा-महेश्वर लिंगोदभूत मंदिर में भी शिव-शक्ति की समन्वित आराधना के लिए भक्तों का अपार हुजूम उमड़ा। भक्तों की इस असीम भीड़ को नियंत्रित व सुगम बनाने के लिए विभिन्न पूजा समितियों द्वारा सुरक्षा, निर्मल पेयजल और आकर्षक विद्युत सज्जा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं, ताकि हर साधक निर्बाध भाव से माता की आराधना कर सके।
महासप्तमी के इस दिव्य प्रवेश के साथ ही अब आगामी महाष्टमी और महानवमी के महाअनुष्ठानों को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह और उल्लास अपने चरम पर पहुंच चुका है। संपूर्ण क्षेत्र मां की परम आराधना में तल्लीन है। बाबा हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशीलचंद्र शास्त्री ने 17 अक्टूबर को बताया कि मां कालरात्रि का यह पावन स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि साधना और समर्पण के प्रकाश से जीवन के हर अंधकार को मिटाया जा सकता है। महासप्तमी की यह बेला अंतःकरण की शुद्धि और भगवद्-प्राप्ति का सर्वोत्तम अवसर है।
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