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बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की बाबा हरिहरनाथ मंदिर में पूजा

हरिहरनाथ मंदिर है बिहार की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर-मुख्य सचिव

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने 22 अगस्त की संध्या सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित ऐतिहासिक बाबा हरिहरनाथ मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर पहुंचने पर मुख्य अर्चक आचार्य सुशील चंद्र शास्त्री एवं अन्य पुजारियों की मौजूदगी में मुख्य सचिव ने विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने राज्य की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण के लिए प्रार्थना की।

इस अवसर पर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि हरिहरनाथ मंदिर बिहार की अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है। मौके पर सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार सहित स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन द्वारा दौरे की व्यवस्था और सुरक्षा का समन्वय किया गया।

बताया जाता है कि मंदिर पहुंचने पर हरिहरनाथ मंदिर न्यास समिति के सचिव विजय कुमार सिंह ‘लल्ला’ और सह-कोषाध्यक्ष मिथिलेश कुमार सिन्हा ने मुख्य सचिव का स्वागत किया। न्यास समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें अंगवस्त्र, पुष्पमाला, बाबा हरिहरनाथ का विशेष प्रसाद और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

सारण डीएम – एसएसपी ने की व्यवस्थाओं की समीक्षा

जानकारी के अनुसार राजकीय श्रावणी मेला 2026 के अंतिम पांच दिनों को लेकर जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार ने बाबा हरिहरनाथ मंदिर परिसर में बैठक की। इस दौरान उपरोक्त अधिकारियों ने मंदिर न्यास समिति के सचिव विजय कुमार सिंह ‘लल्ला’ और प्रतिनियुक्त पुलिस पदाधिकारियों के साथ अब तक की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। बैठक में शेष दिनों में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को और बेहतर बनाने पर चर्चा की गयी।

मंदिर के नंद बाबा ने बताया कि बाबा हरिहरनाथ मंदिर विश्व का एकमात्र शिवालय है, जहां हरि (विष्णु) और हर (शिव) एक ही मंडप में विराजमान हैं। श्रावण शुक्ल पुत्रदा एकादशी से रक्षाबंधन पूर्णिमा तक का काल बेहद अलौकिक है। इस दौरान रुद्राभिषेक सर्वाधिक फलदायी माना गया है। उन्होंने कहा कि पौराणिक मान्यता है कि चातुर्मास में जब विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, सृष्टि का संचालन शिव करते हैं। एकादशी से पूर्णिमा तक हरि और हर तत्व का मिलन इस शिवलिंग में तीव्र ऊर्जा उत्पन्न करता है। श्रीमद्भागवत, वामन, स्कंद और पद्म पुराण के अनुसार यहीं विष्णु ने गज को ग्राह से मुक्त कराया था।

कहा जाता है इस विग्रह की स्थापना ब्रह्माजी ने की थी और स्वयं श्रीराम ने भी यहाँ पूजा की थी। इस पाँच दिवसीय काल में शिववास पृथ्वी पर होने से यह अवधि दोषरहित है। गंगाजल से मोक्ष, कच्चे दूध से संतान सुख, शहद से रोग-पाप नाश, गन्ने के रस से धन-धान्य और घी से आरोग्य प्राप्त होता है।

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