रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षित महिलाओं के सामने रोजगार और अवसरों का गंभीर संकट बना है। पढ़ाई पूरी करने के बावजूद अधिकांश गरीब परिवारों की बेटियां न तो सरकारी नौकरियों के लिए समय पर आवेदन कर पाती हैं और न ही प्रतियोगी परीक्षाओं की पर्याप्त तैयारी कर पाती हैं। आर्थिक तंगी, जानकारी का अभाव और संसाधनों की कमी उनके सपनों को शुरुआत में ही रोक देती है।
समाजसेवी सेवा देवी ने 3 अगस्त को कहा कि सरकार बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन गांवों की वास्तविक स्थिति आज भी चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि कई शिक्षित महिलाएं रोजगार के अवसर नहीं मिलने के कारण स्वयं को असहाय और उपेक्षित महसूस करती हैं। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं होने के कारण अनेक महिलाएं घरेलू हिंसा और सामाजिक भेदभाव जैसी समस्याओं का भी सामना करने को मजबूर हैं।
समाजसेवीका सेवा देवी ने कहा कि गांव की बेटियां अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं, लेकिन आर्थिक कमजोरी, उचित मार्गदर्शन की कमी और रोजगार के सीमित अवसर उनके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा हैं। कहा कि कई गरीब परिवारों की बेटियां एक साधारण नौकरी का आवेदन तक नहीं भर पातीं। यह स्थिति बदलनी होगी।
उन्होंने झारखंड में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों को और प्रभावी बनाने, ग्रामीण स्तर पर निःशुल्क आवेदन सहायता केंद्र स्थापित करने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रशिक्षण एवं परामर्श की व्यवस्था करने तथा गरीब छात्राओं को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की।
समाजसेवी ने कहा कि यदि प्रशासन और सरकार वास्तव में महिला सशक्तिकरण को जमीन पर उतारना चाहते हैं तो गांव की शिक्षित बेटियों को रोजगार, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाना होगा। तभी बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सकेगा और ग्रामीण महिलाओं का सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण संभव होगा।
![]()













Leave a Reply