संतोष कुमार/वैशाली(बिहार)। बिहार (Bihar) में सियासी हलचलों से शायद ही कोई इनकार कर सकेगा। सभी जानते है कि हाल में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के राजनीतिक तेवर ने जनता के बीच एक बहस छेड़ दी है। अक्सर आजकल चौक चौराहे पर वर्तमान सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar), नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के अलावा भी अन्य कई कद्दावर नेताओं का बयान तल्ख देखा जा रहा है। इधर जनता के मन में अब सवाल हिचकोले लेने लगा है कि आखिर यह घमासान क्या सिर्फ महंगाई को लेकर है या फिर यह कोरी राजनीति है अथवा फिर नेता प्रतिपक्ष के युवा ह्रदय की अचानक जागृति है जो कभी उनका राजनीतिक सपना रहा होगा।
हालांकि इतना सरल नहीं कि किसी निष्कर्ष पर इन मामलों में कोई बिना दम लगाए पहुंच जाए। बीते दिन पटना में जो देखने को मिला वह काफी चिंतन करने का आधार प्रस्तुत करता दिख रहा है। एक तरफ नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राज्य की हाल में बनी सरकार जनहित को लेकर काफी निचले स्तर तक प्रशासनिक, वित्तीय सभी तरह के प्रयासों को अब पहले से अधिक तेज करती दिख रही। वहीं दूसरी ओर युवा आईकॉन कहे जा रहे नेता प्रतिपक्ष तथा लालू प्रसाद जैसे कदावर नेता के सुपुत्र तेजस्वी यादव ने सरकार पर जोरदार अटैक अपनी तरफ से किया है। तेजस्वी बीते दिन साईकिल चलाते विधान सभा पहुंचे। वहां उन्होंने मीडिया से बात की। साथ ही उन्होंने राज्य में हाल का जिक्र करते हुए जोरदार तरीके से इस बात को रखा कि महंगाई की पीड़ा सभी लोग झेल रहे हैं। खासकर उन्होंने उन युवाओं का जिक्र किया जिनकी आमदनी काफी सीमित है या फिर वे रोजगार में नहीं हैं। तेजस्वी ने इस दौरान यहां तक कह डाला कि बाईक की सवारी युवाओं को महंगाई की वजह से तकलीफ देने वाला साबित हो रहा है। राजनीतिक हलकों से लेकर दूर दराज के देहाती क्षेत्रों तक में यह चर्चा का विषय बन चुका है। हालांकि यह महज राजनीतिक स्टंट भी आगे चलकर साबित हो, लेकिन इतना तो तय है कि युवा राजनीति अब समाज के केंद्र में चर्चा तेज कर रहा है। जिसका श्रेय उनकी पार्टी के युवा समर्थक अपने नेता प्रतिपक्ष को देते दिख रहे हैं। यह भी संभव है कि इस राजनीतिक घमासान में कोई एक पक्ष चाहे सत्ता पक्ष या विपक्ष या फिर दोनों में से कोई एक राजनीतिक लाभ के प्रयास में हो।
बात चाहे जो भी नेताओं के अंतर्मन में हिचकोले लेता रहता है। जो मीडिया शोध का गहरा विषय कभी कभी ही सही लेकिन बन जाता है। एक बात तय है कि दोनों तरफ से किले को दुरुस्त करने की कवायद काफी तेज हो चुकी है। इसी की चरम परिणति है तेजस्वी का साईकिल सवारी कर विधानसभा पहुंचना। एक बात तो तय नजर आने लगा है कि कहीं न कहीं एक अलग तरह के राजनीति की शुरुआत दस्तक दे रही है। उधर नीतीश सरकार के नुमाइंदे भी कुछ कम नहीं कर रहे। गिरफ्तारियां भी हो रही है। साथ ही सभी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी काफी गति आती दिख रही है। कुछ जानकारों का यह मानना है कि आगे आने वाला वक्त जन सामान्य के लिए एक आश्चर्य का अवसर प्रदान करेगा। हालांकि ऐसी राजनीतिक हलचलों को रूटीन हलचल भी माना जा सकता है। नेता प्रतिपक्ष महंगाई के खिलाफ विधानसभा तक साईकिल से पहुंचकर सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए मीडिया में बयान दे तो यह चिंतन का विषय माना जा सकता है।
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