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खतरनाक हो गया है रेलवे साइडिंग कार्यालय मार्ग

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। एक तो बारिश का मौसम, दूसरा सड़क नुमा गड्ढा को पार करना कामगारों के लिए कष्टदायी होने लगा है। यहां यह कहावत एकदम फिट बैठता है कि एक तो करैला, ऊपर से नीम चढ़ा।

यह हम नहीं तस्वीर खुद बयां करती है। यह दृश्य बोकारो जिला के हद में सीसीएल कथारा क्षेत्र के जारंगडीह रेलवे साइडिंग कार्यालय के मार्ग का है, जहां प्रबंधन की दोहरी नीति से यहां कार्यरत कामगार खासे नाराज दिख रहे हैं।

जानकारी के अनुसार जारंगडीह में सीसीएल कथारा क्षेत्र बीएंडके क्षेत्र तथा का रेलवे साइडिंग स्थित है।बीएंडके व् कथारा क्षेत्र का रेलवे साइडिंग एक ही मार्ग पर स्थित है, जिसमें प्लेटफार्म क्रमांक एक से जहां बीएंडके क्षेत्र द्वारा कोयला ढुलाई किया जाता है वहीं प्लेटफार्म क्रमांक 2 से कथारा क्षेत्र द्वारा रैक से कोयला ढुलाई किया जाता है।

इस रेल मार्ग में कोयला ट्रांसपोर्टिंग के लिए जारंगडीह मुख्य सड़क से एक ही मार्ग दोनों क्षेत्रों के लिए ट्रकों से कोयला ट्रांसपोर्टिंग की जाती है। स्थानीय कामगारों के अनुसार बीएंडके क्षेत्र द्वारा मुख्य सड़क जगरनाथ होटल से कांटा तथा रेलवे साइडिंग उस पार तक आरसीसी निर्माण कार्य किया जा रहा है, आदि।

जिसके कारण मार्ग से सटे दाईं ओर कथारा क्षेत्र का रेलवे कार्यालय तक का मार्ग पूरी तरह गडढानुमा हो गया है। जिसके कारण कार्यालय आने-जाने के क्रम में कई कर्मचारी व अन्य गिरकर घायल हो रहे हैं। यहां कार्यरत दर्जनों कामगारों ने बताया कि यदि यही हाल रहा तो वे सब अपना स्थानांतरण अन्यत्र कराने को मजबूर होंगे।

इस संबंध में साइडिंग प्रबंधक अजीत कुमार सिंह से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि संबंधित कार्य ठेकेदार द्वारा पूर्व में इस कार्य का लेवलिकरण करने का आश्वासन दिया गया था। बावजूद इसके अब ठेकेदार टालमटोल की नीति अपना रहा है। उन्होंने बताया कि उक्त सड़क निर्माण कार्य बीएंडके क्षेत्र द्वारा कराया जा रहा है।

इस बावत जारंगडीह के परियोजना अभियंता संजय सिंह ने बताया कि वह इसे देखकर दुरुस्त कराने का प्रयास करेंगे। जबकि जारंगडीह के परियोजना पदाधिकारी परमानंद गुईन ने फोन रिशीव करना मुनासिब नहीं समझा।

जबकि क्षेत्र के महाप्रबंधक डीके गुप्ता द्वारा कहा गया कि इस संबंध में वे क्षेत्रीय प्रबंधक असैनिक ए के सिंह से बात कर उक्त कार्यालय मार्ग को दुरुस्त कराने का निर्देश देंगे। बरहहाल यह तो कहा हीं जा सकता है कि किसकी जमीन वही हलकान, जो पाया वह मालामाल।

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