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सारंडा क्षेत्र में चिकित्सा एवं शिक्षा सबसे बड़ी समस्या-सांसद

सारंडा के 10 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जाना आवश्यक-गीता कोड़ा

सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। पश्चिम सिंहभूम सांसद गीता कोड़ा ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पश्चिम सिंहभूम क्षेत्र को विकसित करने हेतु जिले की बुनियादी समस्याओं पर प्रमुखता पूर्वक ध्यान देने की अपील की है। सांसद ने सारंडा क्षेत्र में चिकित्सा एवं शिक्षा सुविधा का अभाव सबसे बड़ी समस्या बताया है।

सांसद गीता कोड़ा ने 10 सितंबर को पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में गुवा दौरे के क्रम में उक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीण के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा केंद्र के साथ-साथ बच्चों के लिए बुनियादी शिक्षा के लिए स्कूलों को हर तरह की सुविधा मुहैया करना होगा।

सांसद कोड़ा ने बताया कि यहां के माईस में कार्यरत मजदूर तथा उनके परिवारजन एमडीओ एवं लाल पानी की समस्या से प्रभावित है। कहा कि सेल गुवा खदान में एमडीओ के विरुद्ध झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के नेतृत्व में संयुक्त यूनियनों ने विशाल विरोध प्रदर्शन कर चुके है।

सच्चाई यह है कि सेल प्रबंधन गुवा सेल खदान को एमडीओ का नाम देकर एक निजी कंपनी व ठेकेदार अडाणी व अंबानी को देना चाह रही है। परंतु यहां के सभी संयुक्त यूनियन, सेल कर्मी तथा सारंडा के आसपास गांव के ग्रामीण इसका पुरजोर विरोध कर रहे है।

सांसद ने कहा कि गुवा सेल खदान में निजीकरण होने से सेल में होने वाली बहाली पूरी तरह से बंद हो जाएगी। यहां के स्थानीय रहिवासियों को रोजगार नहीं मिलेगा। सांसद ने बताया कि क्षेत्र में बीस हजार से ज्यादा जरूरतमंद रहिवासी रोजगार से वंचित हैं।

उन्होंने कहा कि जिला के हद में किरीबुरू, मेघाहातुबुरु आदि क्षेत्र के सेल प्रबंधन द्वारा जिन्हें वहाँ बसाया गया था, उन्हें वर्तमान में अतिक्रमण की समस्या के तहत हटाया जा रहा है। सेल किरीबुरू प्रबंधन रहिवासियों को हटाने का कार्य कर रही है। जबकि देखा जाए तो सेल प्रबंधन को आगे बढ़ाने एवं बुनियादी तौर पर कामयाबी की मंजिल तक पहुंचने में क्षेत्र के रहिवासियों व मजदूरों का अग्रणी योगदान रहा है।

सांसद कोड़ा ने गठबंधन में चलने वाली झारखंड की झामुमो सरकार की तहे दिल से प्रशंसा करते हुए बतायी कि झामुमो सरकार की उपलब्धियों के कारण डुमरी विधानसभा की सीट पर सरकार ने जीत का मोहर लगा सकी है। जल, जंगल एवं जमीन को बचाने के लिए क्षेत्र के आदिवासी संघर्ष करते आ रहे हैं। गुवा के आसपास सारंडा के 10 ऐसे गांव हैं जिन्हें पहचान दिलाने का कार्य किया जाना चाहिए।

सांसद ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र के गरीब आदिवासी के उत्थान हेतु उनकी बुनियादी समस्याओं का निराकरण करना होगा। समस्याओं के निराकरण के बाद ही क्षेत्र एवं राज्य की उन्नति संभव है। उन्होंने कहा कि हमारे वीर साथियों की शहादत से अलग झारखंड राज्य मिला। लेकिन आज भी सारंडा, कोल्हान, पोड़ाहाट व लौहांचल के ग्रामीणों, युवाओं की अनेक पीड़ा है।

जंगल में रहने वाले रहिवासियों को वन पट्टा आज तक नहीं मिला। इससे उन्हें तमाम प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कहा कि सारंडा के 10 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जाना नितांत आवश्यक है।

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