Advertisement

विधानसभा स्थापना दिवस पर उत्कृष्ट विधायक के रूप में बगोदर विधायक सम्मानित

अशोक सिंह/बगोदर (गिरिडीह)। झारखंड विधानसभा के 22वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में 22 नवंबर को बगोदर विधायक विनोद कुमार सिंह को झारखंड का बिरसा मुंडा उत्कृष्ट विधायक के रूप में सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल, राज्य के मुख्यमंत्री, संसदीय कार्यमंत्री के अलावे मंत्रीगण, विधायकगण, पूर्व विधायकगण सहित सचिवालयकर्मी, मीडियाकर्मी कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रहे थे।
राज्यपाल के हाथों सम्मानित होने के बाद बगोदर विधायक विनोद सिंह ने अपने उदबोधन में जो बातें कही उससे यह लगा कि क्यों चयन समिति ने कॉमरेड विनोद सिंह को उत्कृष्ट विधायक चुना।

उन्होंने अपने संक्षिप्त उदबोधन में सभी पहलुओं को छुआ।उन्होंने इस सम्मान के लिए सबसे पहले बगोदर विधानसभा की जनता, साथियों, मित्रों, मीडिया कर्मियों व बुद्धिजीवियों को यह सम्मान समर्पित किया।

उन्होंने आगे राज्यभर के आंदोलनों व सड़कों के संघर्षों का भी जिक्र किया और बताया कि संभवतः उन आंदोलनों व संघर्षो के सवालों को उठाने की वजह से ही वे उत्कृष्ट चुने गए। उन्होंने राज्य भर के मीडिया कर्मियों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मीडिया कर्मी उन सवालों को प्रमुखता से प्रकाशित व प्रदर्शित करते रहे हैं।

उन्होंने अपने विधान सभा क्षेत्र के पहले सवाल का जिक्र किया कि कैसे जब वे पहली बार 2005 मे विधायक चुने गए थे तो घाटशिला के उन तीन आदिवासियों का मामला उठाया था। उन्होंने विधानसभा में कहा था कि जिस व्यक्ति की हत्या ही नही हुई थी उस आरोप में तीन निर्दोष जेल में थे।

उस सवाल को उठाने के पहले वो कैसा महसूस कर रहे थे और जिनका सहयोग मिला उन्होंने उसका भी जिक्र किया। उन्होंने एक मुखबिर युवक का भी जिक्र किया कि कैसे एक ही नाम होने के कारण उनको छः माह जेल की हवा खानी पड़ी।

जिसे विधानसभा में उठाया।आदिवासी युवक की हत्या का जिक्र भी उन्होंने किया। जबकि ऐसे कई अनगिनत मुद्दें हैं जिसे उन्होंने गिनाया नही लेकिन उनके द्वारा उठाये गए जनपक्षीय सवालों का झारखंड विधानसभा व राज्य की सवा तीन करोड़ जनता इस बात की गवाह है।

सिंह ने कहा कि कल मैं विधायक रहूँ या न रहूँ विधानसभा को और भी जनता के प्रति उत्तरदायित्व बनाया जाय। इसके लिए प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि कैसे आज भी आजादी के 75 साल व राज्य गठन के 22 साल बाद भी प्रखंडों व अंचलों की कार्य संस्कृति जनता को संतुष्ट नही कर रही है।

उन्होंने इस मौके पर अपने पिता व पूर्व विधायक महेंद्र सिंह को याद करते हुए कहा कि कैसे सामान्य शिक्षा के बावजूद वे पढ़ने-सीखने के अभिरुचियों के कारण विधानसभा के अंदर व बाहर अपनी विशिष्ट पहचान बनायी।

आज सोशल मीडिया के जरिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर या काटकर या मिथ्या फैलाया जा रहा है। हमें भी पढ़ने-सीखने का माहौल राज्य के अंदर बनाना होगा। इसलिए उन्होंने इस सम्मान में मिले राशि को अपने विधानसभा (बगोदर) क्षेत्र के कॉलेजों के पुस्तकालयों के लिए देने की बात कही।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *