प्रहरी संवाददाता/वैशाली (बिहार)। आधुनिक शिक्षा पद्धति को छात्रों के बीच कैसे बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया जाये जिससे छात्र विषय को सुलभ तरीके से इसे अपना सके। इसे लेकर बीते 13 नवंबर को वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर स्थित मैत्रेय कॉलेज ऑफ एजुकेशन में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में बड़ी संख्या में बी आर अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेज के प्रोफेसरगण उपस्थित हुए।
भारतीय भाषा समिति (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) मैत्रेय कॉलेज ऑफ एजुकेशन हाजीपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय मुजफ्फरपुर से डॉ रवि कुमार अंग्रेजी भाषा बच्चों के जुबान पर कैसे आए विषय पर अपना भाषण प्रस्तुत किया।
डॉ सुमंत कुमार ने विद्यालयी शिक्षा में भाषा शिक्षा एवं पर्यावरणीय शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रो. रवि शेखर ठाकुर ने भाषा शिक्षण पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।

उक्त जानकारी देते हुए एमडीडीएम कॉलेज मुजफ्फरपुर के प्रोफेसर डॉ सुमंत कुमार ने 14 नवंबर को एक भेंट में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने इस बात पर जोर दिया है कि विद्यालयी शिक्षा के स्तर पर ही भारतीय भाषाओं के शिक्षण
में आमूल-चूल बदलाव की आवश्यकता है।
विषय या माध्यम, दोनों ही प्रकार से भाषाओं को पढाने की पारंपरिक शैली बच्चों में उस भाषा को सीखने के प्रति अरुचि पैदा करती है। यह भी समस्याग्रस्त है कि शिक्षक आमतौर पर भाषा के स्थान पर साहित्य पढाते हैं। इसलिए, छात्र ऐसी भाषाओं में दक्षता हासिल करने में विफल होते हैं।
साथ ही, बहुभाषी शिक्षण से बच्चों के संज्ञानात्मक विकास में क्या मदद मिल सकती है, इसपर भी विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि यह शोधपरक तथ्य है कि अपनी मातृभाषा में शिक्षा होने से विद्यालय में बच्चें सहज महसूस करेंगे और इसके कारण तेजी से सीख सकेंगे।
अन्य भाषा के माध्यम से सीखना छात्रों के दिमाग को एक ही समय में भाषा और जटिल अवधारणाओ, दोनों के साथ संघर्ष करने के लिए मजबूर करता है, जिसके परिणामस्वरूप सीखने की दर कम हो जाती है।
इसलिए मातृभाषा में शिक्षण होने से बच्चे पाठ्यक्रम की बेहतर समझ अपना पाएंगे और इसका उनके अधिगम प्रतिफल (लर्निंग आउट्कम) पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
कुमार ने बताया कि इन सब के लिए शिक्षक का बहुभाषी होना आवश्यक है। इसके लिए उसके वृत्तिक विकास के तरीकों को सृजित करना होगा। यह भी ध्यान देने योग्य है कि भारत की भावनात्मक एकता और भाषाई सद्भाव को मजबूत करने के लिए बहुभाषिकता को देश के कोने-कोने में लोकप्रिय बनाने की आवश्यकता है।
शिक्षक की तैयारी पर ध्यान दिए बिना यह संभव नहीं हो सकता। इसलिए इस संगोष्ठी में बहुभाषी कक्षाओं के लिए शिक्षकों को तैयार करने के विशेष पहलुओं पर भी चर्चा की गयी। यहां एकभाषी शिक्षकों को बहुभाषी शिक्षकों के रूप में क्षमतावर्धन करने के युक्तियों के सृजन पर भी विचार-मंथन किया गया।
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