मुखिया, वैज्ञानिक, अधिकारी की उपस्थिति में किसानों के बीच जुलाई में बंटा था बीज
निजी बीज वाले किसान का पैदावार बेहतर, सरकारी बीज वाले किसान बर्बाद-सुरेन्द्र
एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। सैकड़ों एकड़ भूमि में लगी पूसा साम्बा 1850 धान की फसल में बाली नहीं निकलने, कुछ में मरहेन्ना, काला एवं खखरा बाली निकलने से किसानों के बीच कोहराम मचा है। पीड़ित किसानों के घरों में चूल्हा-चक्की बंद है। उनके आंखों के आंसू रूक नहीं रहे हैं। मामला समस्तीपुर जिला के हद में ताजपुर प्रखंड के गौसपुर सरसौना पंचायत समेत संपूर्ण प्रखंड का बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार वीते जुलाई माह में सरसौना पंचायत भवन पर मुखिया मनोज राय, पूर्व जीप सदस्य रामप्रीत पासवान, कृषि विश्वविद्यालय पूसा के वैज्ञानिक, कृषि पदाधिकारी ताजपुर आदि की उपस्थिति में खासकर दलित किसानों के बीच पूसा साम्बा 1850 धान की 5 सौ पैकेट बीज का वितरण किया गया था।

किसानों ने पूरी मेहनत तौर- तरीके से अपने- अपने खेतों में धान लगाया। बाजार से बीज लेकर रोपने वाले बगलगीर किसानों का बेहतर पैदावार के साथ फसल तैयार हो गया जबकि सरकारी बीज रोपने वाले सैकड़ों किसानों के खेत में बाली अभी भी घोंघ में ही है। कुछ खेतों में मरहेन्ना, काली एवं खखरी बाली निकली है। धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गया है। इससे क्षेत्र के किसानों के बीच हाहाकार मची है।
किसानों के आग्रह पर अखिल भारतीय किसान महासभा एवं भाकपा माले की टीम सुरेंद्र प्रसाद सिंह, ब्रहमदेव प्रसाद सिंह, महिला नेत्री बंदना कुमारी, मुखिया मनोज राय आदि के नेतृत्व में पीड़ित किसानों क्रमशः अर्जुन राम, शत्रुधन महतो, मंजू देवी, रामराजी राम, राजकुमार राम, शंभु कुमार, प्रभु राम, रीता देवी, सरिता देवी, ममता देवी, कौशल्या देवी, रिंकू देवी, रीता देवी, जलेशरी देवी, फूल कुमारी देवी, शनिचरी देवी आदि किसानों की उपस्थिति में उनके खेतों में जाकर फसल की जांच की गयी।
जांच टीम के सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि बाजार से बीज खरीदकर रोपने वाले किसानों का फसल शानदार है, जबकि सरकारी बीज रोपने वाले बगल के ही सैकड़ों किसानों के धान की फसल पूरी तरह बर्बाद है। विभाग इसकी जांच कर तमाम किसानों को यथाशीघ्र मुआवजा दे। अन्यथा आगामी 21 नवंबर को पीड़ित किसान जुलूस निकालकर कृषि कार्यालय ताजपुर का घेराव करेंगे।
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