अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। श्रावणी मेला की तैयारियों को लेकर सारण जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने एक अगस्त को जिला के हद में सोनपुर मेला स्थल, पहलेजा घाट, बाबा हरिहरनाथ मंदिर परिसर और आमी मंदिर का औचक निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा की। प्रशासन ने सुरक्षा, सुविधा और भीड़ प्रबंधन को लेकर व्यापक निर्देश जारी किए हैं।
बताया जाता है कि जिलाधिकारी ने एक अगस्त की संध्या 5 बजे हरिहरनाथ मंदिर परिसर का सघन निरीक्षण किया और न्यास समिति के सचिव विजय कुमार सिंह ‘लल्ला’ के साथ समन्वय बैठक की। बैठक में श्रद्धालुओं की सुगम एवं सुरक्षित जलाभिषेक यात्रा के लिए व्यवस्थाओं पर सहमति बनी।
बैठक में कहा गया कि गर्भगृह में प्रवेश कतारबद्ध तरीके से ही दिया जाएगा। भीड़ नियंत्रण के लिए सप्ताह में तीन दिन, विशेषकर सोमवारी को अत्याधुनिक अर्घा सिस्टम से जल अर्पण कराया जाएगा। कतारों को सुव्यवस्थित रखने के लिए न्यास के सेवादल कार्यकर्ता 24 घंटे प्रशासन के साथ मुस्तैद रहेंगे। पूरे मेला क्षेत्र, मंदिर परिसर और पहलेजा घाट की सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से निगरानी होगी। संवेदनशील स्थानों पर प्रभावी बैरिकेडिंग, दंडाधिकारियों की तैनाती तथा भारी संख्या में सशस्त्र और महिला पुलिस बल तैनात रहेंगे।
मंदिर परिसर में नियंत्रण कक्ष बनाकर उसे अन्य नियंत्रण कक्षों से जोड़ा गया है। एसडीओ सोनपुर को निर्देश दिया गया है कि वे भवन निर्माण विभाग से बैरिकेडिंग की मजबूती, विद्युत विभाग से वायरिंग सुरक्षा और आपदा प्रबंधन विभाग से सुरक्षा प्रमाण पत्र लेना सुनिश्चित करें। मेला क्षेत्र, कांवड़ पथ और मंदिर परिवेश में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा अस्थायी शौचालय, जगह-जगह शुद्ध शीतल पेयजल स्टॉल, निर्बाध बिजली आपूर्ति और बेहतर प्रकाश व्यवस्था की जाएगी।

बैठक में कहा गया कि सिविल सर्जन सारण द्वारा स्वास्थ्य कैंप, पीए सिस्टम और अन्य आपातकालीन सेवाएं क्रियाशील रहेंगी। यातायात सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों की पहचान, समुचित पार्किंग व्यवस्था और अवैध पार्किंग पर सख्ती बरती जाएगी। मेला परिसर में नियमित साफ-सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
दिघवारा के आमी मंदिर का होगा कायाकल्प
श्रावणी मेला निरीक्षण से पूर्व जिलाधिकारी श्रीवास्तव ने आमी मंदिर और आमी घाट का भी दौरा किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्थल को विश्वस्तरीय सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। इसके लिए उप समाहर्ता भूमि सुधार और अंचलाधिकारी दिघवारा को मंदिर और आसपास की संपूर्ण भूमि की मापी कराकर शीघ्र विस्तृत नक्शा तैयार करने का आदेश दिया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया है।
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