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सोनपुर के युवा पत्रकार गौतम कुमार को दिल्ली में लगनीधारा रत्न सम्मान

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के बैजलपुर रहिवासी युवा डिजिटल पत्रकार गौतम कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए देश की राजधानी नई दिल्ली के हंसराज कॉलेज में लगनीधारा रत्न सम्मान से नवाजा गया। उन्हें यह सम्मान एक अगस्त को दिया गया।

जानकारी के अनुसार लगनीधारा कवि सम्मेलन 1.0 एवं लगनीधारा रत्न सम्मान समारोह में उन्हें यह गौरवपूर्ण पुरस्कार प्रदान किया गया। लगनी फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य करने वाले 10 विशिष्ट गणमान्य जनों को सम्मानित किया गया।
पत्रकार गौतम कुमार को यह सम्मान उनकी निष्पक्ष, निर्भीक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता के लिए दिया गया। समारोह में उनके साथ ही हेलमेट मैन राघवेंद्र प्रताप, एआई विशेषज्ञ अनिमेष पाठक व हिमांशु पोषवाल, बनाना मैन गोपाल नारायण और 19 विश्व रिकॉर्डधारी विनोद कुमार चौधरी समेत अन्य हस्तियों को भी सम्मानित किया गया।

उल्लेखनीय है कि पत्रकारिता श्रेणी में गौतम कुमार सबसे कम उम्र के सम्मानित होनेवालो में शामिल रहे। बैजलपुर के एक साधारण परिवार से आने वाले गौतम का सफर अत्यंत प्रेरणादायक है। पिता की सीमित आय और कम उम्र में ही मां के निधन के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। बिना किसी विशेष संसाधनों के रॉयल यात्रा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन्होंने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बाढ़ और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उनकी निष्पक्ष पत्रकारिता ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि अब राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद गौतम कुमार काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि सोनपुर से दिल्ली की दूरी मात्र एक हजार किलोमीटर हो सकती है, लेकिन यहाँ तक का सफर बहुत कठिन था। कहा कि मेरे लिए पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है। उन्होंने अपना यह सम्मान अपने माता-पिता के संघर्ष, अपने गांव बैजलपुर और अपने समर्थकों को समर्पित किया।

कार्यक्रम की निदेशक रेखा रॉय ने बताया कि लगनी फाउंडेशन शिक्षा, साहित्य और युवा सशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। उन्होंने कहा कि गौतम जैसे युवा पत्रकारों का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना ग्रामीण परिवेश के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। गौतम की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि यदि पत्रकारिता में ईमानदारी और जनहित का भाव हो, तो गांव की गलियों से उठकर भी देश की राजधानी में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया जा सकता है।

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