रिटायर कर्मियों की न्यूनतम पेंशन ₹1000, इलाज के लिए 25 लाख तक का कवर
एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। देश की महारत्न कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने अपने 4.5 लाख से अधिक सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के जीवन को आसान बनाने के लिए पेंशन, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा में कई बड़े सुधार लागू किए हैं। कंपनी ने इसे राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देने वाले पूर्व कर्मियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बताया है।
जानकारी के अनुसार कंपनी की सबसे अहम पहल के तहत कोल माइंस पेंशन योजना के अंतर्गत न्यूनतम मासिक पेंशन को 8 मार्च 2024 से बढ़ाकर ₹1,000 कर दिया गया है। इससे लगभग 40,000 पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिला है। इसके साथ ही सीआईएल ने कोल माइंस प्रोविडेंट फंड संगठन (सीएमपीएफओ) के साथ मिलकर सी-केयर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पेंशन प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस बना दिया है। अब सेवानिवृत्ति संबंधी दावों का निपटान औसतन 30 दिन से घटकर सिर्फ 10 दिन में हो रहा है।
वहीं, स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने के लिए कंपनी की अंशदायी सेवानिवृत्ति उपरांत चिकित्सा योजना (सीपीआरएमएस) के तहत 1.13 लाख सेवानिवृत्त कर्मी देशभर के 532 सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज करा सकते हैं। योजना के अनुसार सेवानिवृत्त अधिकारियों को 25 लाख रुपये और गैर-अधिकारियों को 8 लाख रुपये तक का चिकित्सा कवरेज दिया जा रहा है। गंभीर बीमारियों के लिए यह सीमा अतिरिक्त है।
कोल इंडिया प्रबंधन के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में सीआईएल ने भविष्य निधि का वितरण 19.5 प्रतिशत बढ़ाकर ₹13,608.8 करोड़ और पेंशन वितरण 22.9 प्रतिशत बढ़ाकर ₹6,427 करोड़ कर दिया है। इस प्रकार कंपनी ने सेवानिवृत्त कर्मियों के कल्याण पर कुल ₹34,151.1 करोड़ खर्च किए हैं। कंपनी ने मुख्यालय और सभी सहायक कंपनियों में पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट सेल भी शुरू किए हैं, जो रिटायर कर्मियों के लिए वन-स्टॉप हेल्प सेंटर की तरह काम करेंगे।
साथ ही कंपनी अपने हॉली-डे होम्स की सुविधा भी सेवानिवृत्त कर्मियों को दे रही है, ताकि उनके सामाजिक जुड़ाव को बढ़ावा मिल सके। सीसीएल मुख्यालय रांची के जनसंपर्क विभाग के अनुसार सीआईएल प्रबंधन के इन कदमों से झारखंड समेत पूरे देश में कोल सेक्टर के सेवानिवृत कर्मचारियों को वित्तीय सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
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