पारंपरिक ज्ञान, समुदाय व् स्टेकहोल्डर्स से जलवायु परिवर्तन का मुकाबला-कल्पना
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड की राजधानी रांची स्थित ऐतिहासिक ऑड्रे हाउस में सारथी नेटवर्क और झारखंड जस्ट ट्रांजिशन नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में 22 जुलाई को दो दिवसीय जलवायु अखड़ा का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि गांडेय (गिरिडीह) विधायक कल्पना सोरेन ने पौधे में जल अर्पित कर की।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विधायक कल्पना सोरेन ने सारथी नेटवर्क और जमीनी स्तर के सामाजिक संगठनों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हम छोटे-छोटे और निरंतर प्रयास कर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जारी लड़ाई को मुकाम तक पहुँचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासी और मूलवासियों के पारंपरिक ज्ञान को आधार बनाकर ही हमें आगे बढ़ना होगा, ताकि राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और धरोहर को अक्षुण्ण रखा जा सके। कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए समाज के सभी स्टेकहोल्डर्स को एक मंच पर आना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
मौके पर सारथी नेटवर्क के संस्थापक सदस्य जॉन्सन टोप्पो ने कहा कि जलवायु अखड़ा सरकार, सामाजिक संगठनों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों, कम्युनिटी लीडर्स और जमीनी कार्यकर्ताओं को एक साथ लाने वाला एक अनूठा मंच है। उन्होंने कहा कि झारखंड की जलवायु की कहानी सिर्फ कोयले, सोलर पैनल या कार्बन उत्सर्जन तक सीमित नहीं है। यह कहानी बदलती बारिश के बीच ढलते गाँवों, जंगलों के हक के लिए प्रयासरत ग्राम सभाओं, हमारे पारंपरिक खान-पान और खनन से इतर आकार लेती स्थानीय अर्थव्यवस्था की है।
असर संस्था की सीईओ वीनूता गोपाल ने कहा कि सारथी नेटवर्क पर्यावरण अनुकूल विकास और समानता के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि राज्य के भविष्य से जुड़ी नीतियों में जंगल पर निर्भर समुदायों, किसानों, महिलाओं, मजदूरों और आदिवासियों की आवाज को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड की सीजीएम दीपमाला घोष, वन विभाग के पीसीसीएफ ए. टी. मिश्रा, जेएसएलपीएस की सीईओ अनन्या मिश्रा एवं कृष्णकांत ने जमीनी हकीकत पर अपने विचार रखे और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सामूहिक रूप से कदम बढ़ाने का आह्वान किया।
दो दिवसीय आयोजन के दौरान विभिन्न सामयिक और गंभीर विषयों पर गहन पैनल डिस्कशन आयोजित किए गए, जिनमें पारंपरिक खान-पान और स्थानीय अर्थव्यवस्था, बदलती जलवायु में पारंपरिक खान-पान की भूमिका।
जल संसाधन पानी दामोदर नदी एक, जीवन अनेक, जैव विविधता व वन अधिकार, जंगली आजीविका और जैव विविधता संरक्षण, ऊर्जा संक्रमण, कोयले से अक्षय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) की ओर न्यायसंगत बदलाव। स्थानीय शासन पंचायत, चौपाल, कॉर्पोरेट, समुदाय और जलवायु न्याय आदि विषयों पर गहन मंथन किया गया।
इस आयोजन में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए लगभग 400 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सारथी नेटवर्क के मुन्ना झा, घनश्याम, सुरेश कुमार शक्ति, गौतम सागर, शेखर, गुलाबचंद, पारोमिता प्रांजल, मीनाक्षी, अंकिता, रिचा चौधरी, मिथिलेश कुमार, शंकर रवानी सहित कई सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही।
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