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पुलिस बर्बरता के खिलाफ एआईएसएफ द्वारा अल्बर्ट एक्का चौक पर पुतला दहन

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। देश की राजधानी दिल्ली में संसद मार्च के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बीते 20 जुलाई को हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) झारखंड के नेतृत्व में पुतला दहन किया गया।

झारखंड की राजधानी राँची स्थित अल्बर्ट एक्का चौक पर दिल्ली में संसद मार्च के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में 21 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला दहन किया गया। इस अवसर पर एआईएसएफ झारखंड प्रदेश सचिव विक्रम कुमार ने कहा कि केंद्र की तानाशाही सरकार द्वारा संसद मार्च कर रहे शांतिपूर्ण छात्र-युवाओं पर किया गया बर्बर लाठीचार्ज लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा प्रहार है।

यह केवल छात्रों पर हमला नहीं, बल्कि देश के संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने कहा कि जो सरकार छात्रों के सवालों का जवाब देने में असफल हो जाती है, वही सरकार लाठी और दमन का सहारा लेती है। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा शिक्षा, रोजगार, महंगाई और अपने भविष्य को लेकर जवाब मांग रहा है, लेकिन सरकार संवाद करने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है।

सत्ता के अहंकार में डूबी केंद्र की मोदी सरकार यह समझ ले कि लाठियां विचारों को नहीं रोक सकतीं, न ही छात्र-युवा आंदोलनों को कुचल सकती हैं। इतिहास गवाह है कि जब-जब सत्ता ने लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने की कोशिश की है, तब-तब जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से उसका जवाब दिया है। साथ ही, केंद्र सरकार यह भूल रही है कि देश का युवा अब चुप रहने वाला नहीं है।

छात्रों और युवाओं पर बरसाई गई हर लाठी लोकतंत्र के माथे पर एक काला धब्बा है। हम इस दमन के सामने झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष और अधिक तेज़, व्यापक और संगठित होगा। देश का युवा इस दमनकारी और जनविरोधी रवैये का जवाब लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से सड़कों से लेकर जनता की अदालत तक देगा। कहा कि सत्ता का अहंकार हमेशा के लिए नहीं रहता। जनता की आवाज़ को हमेशा दबाया नहीं जा सकता।

मौके पर मुख्य रूप से मौजूद एआईएसएफ प्रदेश सह सचिव एहतेसाम प्रवीण ने कहा कि सत्ता का अहंकार लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। देश को ऐसी सरकार चाहिए जो जनता की आवाज़ सुने, न कि अहंकार में उसे दबाए। उन्होंने कहा कि अहंकारी नहीं, जवाबदेह सरकार चाहिए। छात्रों के साथ बर्बरता करना मोदी सरकार को महंगा पड़ेगा।
मौके पर दर्जनों एआईएसएफ समर्थक सहित आम राहगीर उपस्थित थे।

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