प्रहरी संवाददाता/बोकारो। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) द्वारा अधिग्रहित भूमि संपत्तियों के इष्टतम उपयोग और कुशल प्रबंधन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भूखंडों एवं भूमि के पट्टा (लीज) नवीनीकरण के लिए व्यापक नीति की घोषणा की गई है।
बीते 15 मई से प्रभावी यह नीति पट्टा नवीनीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुस्पष्ट और सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है। यह मानक व्यवस्था विशेष रूप से केवल उन मौजूदा पट्टों के नवीनीकरण मामलों पर लागू होगी जिनकी अवधि समाप्त हो चुकी है या जो नवीनीकरण के लिए देय है। इसे किसी भी नए आवंटन पर लागू नहीं किया जाएगा।
इस नीति के अंतर्गत भूमि के पट्टों को तीन विशिष्ट श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। श्रेणी एक में वाणिज्यिक संगठनों जैसे केंद्रीय लोक उपक्रम, राज्य सार्वजनिक उपक्रम, बैंक, एटीएम, बीमा कंपनियां, निजी प्रतिष्ठान, पेट्रोल पंप और वाणिज्यिक परिसरों को शामिल किया गया है। श्रेणी दो के तहत केंद्रीय और राज्य सरकार के विभागों, नगर निगमों, पेशेवर निकायों, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और शैक्षणिक संस्थानों को रखा गया है। जबकि, श्रेणी तीन में सामाजिक, धार्मिक, चैरिटेबल और कल्याणकारी संस्थाओं यथा मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, श्मशान घाट, कब्रिस्तान, चैरिटेबल स्कूल एवं अस्पताल, सार्वजनिक पुस्तकालय और दिव्यांगजनों व महिला कल्याण के लिए कार्यरत संगठनों को शामिल किया गया है।
सेल द्वारा पट्टा नवीनीकरण शुल्क को अधिक तर्कसंगत बनाते हुए श्रेणी एक (वाणिज्यिक) के लिए वर्तमान भूमि प्रीमियम का 25 प्रतिशत और श्रेणी दो (सरकारी/गैर-वाणिज्यिक) के लिए 10 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि श्रेणी तीन (सामाजिक/धार्मिक/धर्मार्थ) के लिए मात्र 1 रुपये की टोकन राशि तय की गई है। नए गाइड लाइन के तहत वार्षिक ग्राउंड रेंट और सेवा शुल्क के तीन गुना के बराबर राशि ब्याज-मुक्त सिक्योरिटी डिपाजिट के तहत देय होगा।
इसी प्रकार वार्षिक ग्राउंड रेंट अब नवीनीकरण शुल्क का एक प्रतिशत होगा जिसमें प्रत्येक पांच वर्ष में पिछले भुगतान पर 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। जबकि, पुराने नियम के अनुसार यह भूमि मूल्यांकन का एक प्रतिशत था। नए गाइड लाइन के तहत वार्षिक सेवा शुल्क अब नवीनीकरण शुल्क का 2 प्रतिशत होगा, जिसमें प्रत्येक पांच वर्ष में पिछले भुगतान पर 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, जबकि पुराने नियम के अनुसार यह भूमि मूल्यांकन का 2 प्रतिशत था। इसके अतिरिक्त, एक अप्रैल 2008 को या उसके बाद नवीनीकृत हो चुके मामलों के लिए नए गाइडलाइन के अनुसार ग्राउंड रेंट और सेवा शुल्क का पुनर्निर्धारण किया जाएगा तथा किसी भी अतिरिक्त भुगतान को भविष्य के बकाये में समायोजित किया जाएगा।
वैसे मामले जहाँ नवीनीकरण नहीं कराये जाने के कारण लीज़ पहले ही ख़त्म हो चुका है, उन्हें एक मौका देते हुए यह प्रावधान रखा गया है कि यदि नई नीति जारी होने के एक वर्ष के भीतर वे नवीनीकरण करा लेते हैं, तो उन्हें दंडात्मक ब्याज से छूट देते हुए केवल भारतीय स्टेट बैंक की नकद साख दर पर साधारण ब्याज देय होगा। निर्धारित अवधि के बाद नवीनीकरण कराने पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण दंडात्मक ब्याज देय होगा। इसके अलावा लगातार डिफॉल्ट करने पर पट्टाधारक को अनधिकृत कब्जाधारी मानकर बेदखली एवं अन्य विधि सम्मत कार्रवाई भी की जा सकती है। सेल की यह नीति बोकारो इस्पात संयंत्र की भूमि संपत्तियों के संरक्षण, कानूनी अनुपालन और शहरी बुनियादी ढांचे के सुव्यवस्थित विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में अहम है।
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