अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम मंदिर में 30 अप्रैल को भगवान नृसिंह का प्राकट्योत्सव पूर्णतः वैदिक विधि -विधान के साथ आयोजित किया गया।
ज्ञात हो कि, श्रीवैष्णव दर्शन में नृसिंह अवतार को परमात्मा के प्रथम पांच स्वरूपों में से एक अर्चावतार एवं विभवावतार का संगम बताया गया है। भगवान का यह रूप बताता है कि ईश्वर अपने भक्त के लिए किसी भी सीमा को तोड़ सकते हैं।
इस अवसर पर देवस्थानम के अर्चकों शिव कुमार शास्त्री, गौरव शास्त्री एवं नन्द किशोर शास्त्री ने भगवान के श्रीविग्रह का अभिषेक कर वस्त्र आभूषण से अलंकृत कर अलौकिक आनन्द सहित भगवान नरसिंह का प्राक्ट्योत्सव मनाया। भव्य आरती और उसके उपरांत प्रसाद का वितरण किया गया।
इस पावन मौके पर श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने नेपाल से अपने संदेश में कहा कि श्रीवैष्णव दर्शन में नृसिंह अवतार परमात्मा के प्रथम पांच स्वरूपों में से एक अर्चावतार एवं विभवावतार का संगम है। भगवान का यह रूप बताता है कि ईश्वर अपने भक्त के लिए किसी भी सीमा को तोड़ सकते हैं। उन्होंने भक्तों को संदेश दिया कि हिरण्यकश्यप के वरदान की सभी शर्तें बचा कर भगवान ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।
यह दर्शाता है कि शरणागत की रक्षा करना भगवान का व्रत है। वे अपने नियम भी भक्त के लिए बदल देते हैं। यही अघटित- घटना- सामर्थ्य है। सिंह का उग्र रूप परत्व यानी ईश्वर की सर्वोच्च शक्ति दिखाता है। भक्त प्रह्लाद को गोद में लेना उनका सौलभ्य यानी सुलभता दिखाता है। उन्होंने कहा कि श्रीरामानुज दर्शन कहता है कि ईश्वर जितना महान है, उतना ही दयालु भी है।प्रह्लाद ने कहा था कि कण कण में भगवान हैं। स्तम्भ से प्रकट होकर श्रीहरि ने सिद्ध किया कि वे सर्व व्यापक हैं। भक्त जहां से पुकारे, वहीं प्रकट हो जाते हैं।
स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने अपने संदेश में कहा कि हिरण्यकश्यप अहंकार का प्रतीक है और प्रह्लाद जीवात्मा का। जब जीव अहंकार त्याग कर अनन्य भाव से श्रीहरि की शरण लेता है, तो भगवान नृसिंह रूप में उसके सारे भय हर लेते हैं। इस अवसर पर मंदिर परिसर में लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् स्तोत्र का पाठ किया गया। भक्तों ने माना कि नृसिंह जयंती केवल कथा नहीं, शरणागति के जीवंत दर्शन का उत्सव है। न ततो न माता न बन्धुर्न दाता, न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता। त्वमेकं शरण्यं त्वमेकं वरेण्यं, त्वमेकं शरणं नृसिंह नमामि। मौके पर मुकेश ठाकुर, संजय सिंह सहित बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद थे।
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