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चाईबासा में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में 1 लाख इनामी नक्सली इसराइल पूर्ति ढेर

प्रहरी संवाददाता/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिमी सिंहभूम जिला चाईबासा का कोल्हान रिजर्व वन क्षेत्र एक बार फिर गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा। जब 29 अप्रैल की सुबह लगभग 4.30 बजे टोंटो थाना क्षेत्र के दुर्गम रूटागुटू जंगलों में सुरक्षा बलों और प्रतिबंधित माओवादी संगठन के बीच सीधी मुठभेड़ हो गयी। इस घटना में एक नक्सली मारा गया है। मृतक की पहचान इजराइल पूर्ति के रूप में की गयी है। उसपर एक लाख का इनाम घोषित था। घटनास्थल से शव के साथ हथियार और अन्य संदिग्ध सामग्री भी बरामद की गई है, जिन्हें जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।

सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई और मुठभेड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सारंडा और कोल्हान के घने जंगलों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जिला के हद में रूटागुटू की यह मुठभेड़ इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कोल्हान के जंगलों से लाल आतंक का नेटवर्क अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति और माओवादियों की छापामार रणनीति सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बन गयी है। देखना यह है, कि सुरक्षा बलों का यह अभियान मिसिर बेसरा जैसे बड़े माओवादी नेताओं तक पहुंचने में कितना सफल होता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सुरक्षा बलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि माओवादियों का एक दस्ता रूटागुटू के पहाड़ी और घने वन क्षेत्र में छिपा है। इसके आधार पर सीआरपीएफ, कोबरा 209 बटालियन और स्थानीय पुलिस के जवानों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया. अहले सुबह लगभग 4:30 बजे जैसे ही जवान आगे बढ़े कि पहले से घात लगाकर बैठे माओवादियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग की। देखते देखते पूरा इलाका युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया।

बताया जाता है कि सुरक्षा बल पिछले 48 घंटों से गोइलकेरा थाना क्षेत्र के बोरोई और तूनबेड़ा के आसपास सघन सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। जवानों की गतिविधियों की भनक माओवादियों को लग चुकी थी, जिसके बाद वे रूटागुटू के जंगलों में मोर्चाबंदी कर जवानों का इंतजार कर रहे थे। हाल में गोइलकेरा क्षेत्र में पूर्व माओवादी रमेश चांपिया की निर्मम हत्या ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए थे। इस हत्याकांड के बाद से ही खुफिया इनपुट मिल रहा था कि कुख्यात माओवादी नेता मिसिर बेसरा का दस्ता इस इलाके में फिर से सक्रिय हो रहा है।

खबर के अनुसार माओवादी अब बड़े समूहों के बजाय छापामार रणनीति के तहत छोटे-छोटे ग्रुप में बंटकर हमले कर रहे हैं, ताकि सुरक्षा बलों को अधिक नुकसान पहुंचाया जा सके और वे आसानी से जंगलों में ओझल हो सके। बताया जाता है कि 29 अप्रैल के मुठभेड़ के बाद पूरे कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सुरक्षा बल अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे हैं। घने जंगलों के ऊपर ड्रोन से माओवादियों की लोकेशन ट्रेस की जा रही है। मुठभेड़ स्थल की ओर अतिरिक्त फोर्स रवाना कर दी गई है। सुरक्षा बलों द्वारा माओवादियों के भागने के तमाम रास्तों को सील कर दिया गया है।

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