एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। बिहार की सांस्कृतिक संस्था लोक पंच द्वारा 21 दिसंबर को राजधानी पटना के गांधी मैदान स्थित सरस मेला में नाटक साइबर क्राइम का मंचन किया गया। नाटक के लेखक-निर्देशक प्रसिद्ध रंगकर्मी व् टीवी कलाकार मनीष महिवाल हैं।
नाटक साइबर क्राइम का कथासार इस प्रकार है कि उक्त नाटक पति-पत्नी की नोक- झोंक से शुरू होता है। इस दौरान एक फोन आता है और ओटीपी माँगा जाता है। फोन करनेवाले को पत्नी ओटीपी देने लगती है, तो पति मना करता है। बावजूद इसके पत्नी ओटीपी दे देती है। बाद में वह अपने पति को बताती है कि मुझे मालूम है कि वह मेरे साथ फ्रॉड कर रहा था, पर मैंने उसे गलत ओटीपी दे दिया। मुझे मालूम है ओटीपी शेयर करने से नुकसान होता है, हम गांव से आए हैं इसका मतलब यह नहीं कि हम बेवकूफ है।
नाटक के अगले दृश्य में एक व्यक्ति अपने मित्र से बकाया पैसे मांगता है। इसी बातचीत के दौरान पता चलता है कि मित्र का फेसबुक अकाउंट किसी ने हैक कर रखा है। वह उसके मित्रों से पैसा मांग रहा है। ऐसी फेक और फ्रॉड साइबर क्राइम करने वाले से सावधान रहने की बात बताई जाती है। नाटक के अगले दृश्य में अनजान और फ्रॉड लिंक पर क्लिक करने का क्या परिणाम होता है, यह दिखाया गया है।
नाटक में गायक मोहम्मद रफी के गाए गीत बार-बार के तोहरे कमईयया चोरवा ना ले जाए, जागत रहा भैया तू सोए मत जइह को गया गया है, जिसके माध्यम से जालसाज़ और साइबर अपराधियों से अपने धन को बचाने की बात कही जाती है। इसके अलावा और कई लोकप्रिय गीतों का नाटक में इस्तेमाल किया गया है। नाटक के अंत एक पात्र कहता है कि अब मुझे कोई भी साइबर क्राइम करने वाला ठग नहीं सकता है, क्योंकि मैं मुर्ख नहीं हूं।
नाटक की प्रस्तुति के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ पदाधिकारी विकास कुमार उपस्थित रहे तथा उन्होंने नाटक की सराहना की। उक्त नाटक में रजनीश पांडेय, अभिषेक राज, सहर्ष शुभम, अरबिंद कुमार, दीपा दीक्षित, सोनल कुमारी, रोहित कुमार एवं मनीष महिवाल ने अपनी कलाकारी से नाटक दर्शकों के मन को झकझोरते हुए उन्हें बीच बीच में गुदगुदाया और रोमांच भी लाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। मंच से परे उक्त नाटक में नाल पर अजीत कुमार, खंजरी पर अरविंद कुमार तथा प्रस्तुति नियंत्रक राम प्रवेश ने अपने किरदारों को बखूबी निभाया।
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