बिलखते परिजन, बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
प्रहरी संवाददाता/गोमिया/बोकारो थर्मल (बोकारो)। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के एक होटल में मजदूरी करने गए बोकारो जिला के हद में गोमिया प्रखंड के चतरोचट्टी रहिवासी हीरालाल नायक की मौत इलाज के दौरान मुम्बई के जेजे अस्पताल में हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बिलखते परिजनों के अनुसार, होटल मालिक से पैसों को लेकर विवाद के बाद हीरालाल घायल अवस्था में रेलवे पुलिस को मिला थे। जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब 13 दिनों तक उनका इलाज चला और बीते 11 सितंबर को उनका निधन हो गया।
प्रवासी मजदूर हीरालाल नायक अपने पीछे पत्नी अनीता देवी और दो मासूम बेटियों को छोड़ गए हैं। हीरालाल की मौत से परिवार के सामने भावनात्मक पीड़ा के साथ-साथ आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। परिवार का भरण-पोषण करने वाले हीरालाल के निधन के बाद पत्नी और दोनों छोटी बेटियों के भविष्य को लेकर परिजन चिंतित हैं।
मृतक की बड़ी पुत्री अंशिका करीब साढ़े तीन वर्ष और छोटी बेटी कीर्तिका लगभग डेढ़ वर्ष की बतायी जा रही है। जिस उम्र में दोनों बेटियों को पिता की उंगली थामकर चलना और उनकी गोद में खेलना था, उस उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया। हीरालाल की मौत से परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रवासी मजदूरों के हित में कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने शोकाकुल परिवार से संपर्क किया। उन्होंने परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है और मुंबई से शव को पैतृक गांव चतरोचट्टी लाने की प्रक्रिया में सहयोग किया जा रहा है। परिजनों द्वारा बताए गए होटल मालिक से विवाद और उसके बाद हीरालाल के घायल अवस्था में मिलने की घटना को लेकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
परिजनों का कहना है कि घटना की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि किसी की लापरवाही या दोष सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। शोकाकुल परिवार ने सरकार और प्रशासन से आर्थिक सहायता, कानूनी सहयोग तथा शव को सम्मानपूर्वक गांव पहुंचाने में मदद की अपील की है। किंतु आज भी सवाल उठता है कि आखिर कब तक पलायन की भेंट चढेगें झारखंड के प्रवासी मजदूर।
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