एस. पी. सक्सेना/बोकारो। जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा की ओर से मनाए जा रहे पर्युषण पर्व के चौथे दिन 11 सितंबर को वाणी संयम दिवस मनाया गया। इस अवसर पर चास के माणिक चंद छल्लानी आवास पर आयोजित प्रवचन सत्र में पधारीं उपासिका शांति गुजरानी एवं सहयोगिनी निहारिका सिंघी ने वाणी की महत्ता पर प्रकाश डाला।
जानकारी देते हुए जैन समाज तेरापंथ समाज के मीडिया प्रभारी सुरेश बोथरा ने कहा कि विदुषी शांति गुजरानी ने कहा कि आपकी वाणी ही आपके व्यक्तित्व की पहचान है। वाणी पर अगर संयम नहीं तो आपका सारा धर्म कर्म बेकार है। अतः हर हाल में हमें अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। कठोर वाणी नहीं बोलनी चाहिए। इंसान को वाणी में मधुरता रखनी चाहिए।

विदुषी निहारिका ने कहा कि हमें अच्छे शब्दों का चुनाव करना चाहिए। इंसान को बोलने का और खाने का दोनों में ही संयम रखना चाहिए। हमारे इस जीभ में अमृत भी है और जहर भी, लेकिन हमें हमेशा वाकपटुता रखनी चाहिए। उपासिका ने आचार्य महाश्रमण के बारे में बताते हुए कहा कि गुरुदेव सबकी सुनते हैं, लेकिन उनकी वाणी पर उनका इतना संयम है कि वह बहुत कम शब्दों में मुस्कुराकर उत्तर देते हैं। इसी प्रकार हम भी अगर वाणी संयम रखें तो हमारे आपसी रिश्तों में सामंजस्य बना रहेगा, मधुरता बनी रहेगी। कहा कि जहां वाणी संयम न हो वहां संबंधों में बिखराव आ जाता है।
मौके पर सरोज छल्लानी, अरिहंत जैन, विनोद चोपड़ा, मदन चौरड़िया, सुशील बैद, बजरंग लाल चौरड़िया, शांतिलाल लोढा, श्रेयांश चौरड़िया, आदित्य चौरड़िया, सिद्धार्थ चौरड़िया, कनक जैन, अलका चौरड़िया, सुमन, विनीता बैद, सुनीता कोठारी सहित तेरापंथ समाज के दर्जनों साधक जन उपस्थित थे। नौदिवसीय पर्युषण पर्व के क्रम में 12 सितंबर को अणुव्रत चेतना दिवस मनाया जाएगा।
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