चुनरी और खीर के भोग से की गयी मां को प्रसन्न, भक्तों ने मांगी सुख-समृद्धि की दुआ
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। भादो मास की पावन अमावस्या तिथि पर जब पितरों के तर्पण और शक्ति साधना का विशेष संयोग बनता है, तब सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के डुमरी बुजुर्ग गांव स्थित सिद्धपीठ मां कालरात्रि मंदिर में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। इसे लेकर 11 सितंबर को डुमरी बुजुर्ग स्थित सिद्धपीठ मां कालरात्रि मंदिर में आयोजित वार्षिक महोत्सव में उपस्थित जनसमूह द्वारा जय मां कालरात्रि के उद्घोष से समूचा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इस अवसर पर मां के दिव्य दर्शन और कृपा प्राप्त करने के लिए सारण ही नहीं बल्कि निकटवर्ती वैशाली और बिहार की राजधानी पटना तक से श्रद्धालु खिंचे चले आए। प्रातःकाल से ही मंदिर के गर्भगृह से लेकर प्रांगण तक भक्तों की अटूट कतार लगी रही। वार्षिक महापूजा का शुभारंभ प्रातः 7 बजे मंदिर के पुजारी पं. हिमांशु मिश्रा के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। मंदिर समिति के सचिव जितेंद्र कुमार जीतू ने मुख्य जजमान के रूप में मां कालरात्रि की पिंडी पर श्रद्धा की चुनरी अर्पित कर पूरे क्षेत्र के कल्याण, सुख-शांति, समृद्धि और आपसी प्रेम-सद्भाव की मंगलकामना की।
इस पावन अनुष्ठान में कृष्ण मोहन सिंह उर्फ लड्डू बाबू, भोला सिंह, अमोद सिंह, सुशील सिंह सहित अनेक धर्मप्रेमी शामिल हुए। मां के श्रृंगार के पश्चात विधि-विधान से हवन और महाआरती संपन्न हुई। आरती के दिव्य स्वरों और शंख-घंटियों की ध्वनि के बीच जब भक्तों ने मां के जयकारे लगाए, तो पूरा परिसर अलौकिक ऊर्जा से भर गया। अंत में सभी भक्तों में महाप्रसाद का वितरण किया गया।
इस महोत्सव की सबसे दिव्य झलक मातृशक्ति की भागीदारी में दिखी। सुहागिन महिलाओं ने अपने घरों में श्रद्धापूर्वक दाल-पूरी और गुड़ की खीर का पवित्र भोग तैयार कर मां के चरणों में अर्पित किया। स्थानीय मान्यता है कि डुमरी बुजुर्ग की मां कालरात्रि सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी करती हैं और मन्नत पूर्ण होने पर भक्त मां को चुनरी चढ़ाकर कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह परम्परा पीढ़ियों से अनवरत चली आ रही है।
ज्ञात हो कि, वार्षिक महोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से दुल्हन की तरह सजाया गया था। मंदिर के आसपास श्रृंगार, प्रसाद, खिलौने और व्यंजनों की दुकानें सजी थी। बच्चों के लिए लगे झूलों ने मेले को और भी आकर्षक बना दिया। दोपहर बाद आयोजित भजन-कीर्तन में श्रद्धालु देर शाम तक भक्ति रस में सराबोर होकर झूमते रहे। व्यवस्था में स्थानीय युवा सेवादल ने सराहनीय सहयोग दिया।
डुमरी बुजुर्ग में आयोजित श्रद्धा के इस महापर्व का समापन रात्रि में भव्य देवी जागरण और सांस्कृतिक संध्या के साथ किया गया, जिसमें प्रसिद्ध भजन मंडलियों द्वारा मां के महिमा गान की प्रस्तुति की गई। इस दिव्य जागरण पर भक्तों में भारी उत्साह दिखा।
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