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सोनपुर के बाढ़ पीड़ितों को मिले फसल क्षति राशि, पशुपालकों को भूसा-चारा-सुनील राय

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में बाढ़ प्रभावित सोनपुर स्थित जिला परिषद् भाग-3 के पार्षद सुनील कुमार राय ने 11 सितंबर की शाम कहा कि सोनपुर प्रखंड के सभी बाढ़ पीड़ितों को फसल क्षति की राशि मिलनी चाहिए। एक भी पीड़ित परिवार इससे वंचित नहीं रहना चाहिए। इसी तरह दियारा क्षेत्रों में रह गए पशुपालकों के लिए पशु चारा-भूसा की व्यवस्था की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के सबलपुर की चारों पंचायतों से जो भी पशुपालक बाढ़ में अपने माल-मवेशी लेकर सोनपुर के मिरदाहां गांव आए थे, उनके रहने के लिए स्काउट एंड गाइड के कार्यालय परिसर को खुलवाया गया। इसके बाद प्रशासन से पशुओं के लिए चारे की मांग की गई। प्रशासन द्वारा चारा एवं तिरपाल का वितरण किया गया।

राय ने कहा कि इन बाढ़ पीड़ित पशुपालकों के लिए कम्युनिटी किचन की मांग की गई, जिसके बाद प्रशासन ने इसकी व्यवस्था की। यहां मुख्यमंत्री भी आए थे। बताया कि राहर दियारा चौक से डीआरएम कार्यालय के रास्ते में जो पशुपालक अपने माल-मवेशी लेकर आए थे, उनके लिए शुरुआती दो दिनों तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी थी। जब उन्हें इस ज्वलंत समस्या की जानकारी मिली तो सोनपुर में मौजूद सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया। डीएम ने तत्परता दिखाते हुए रेलवे सामुदायिक भवन पहुंचकर उसका गेट खुलवाया। डीएम के आदेश पर ही यहाँ कम्युनिटी किचन संचालित किया गया। पशुपालकों के बीच तिरपाल बांटा गया और मवेशियों के लिए चारा वितरित किया गया।

जिला पार्षद राय ने कहा कि इनके अतिरिक्त क्षेत्र के किसी अन्य बाढ़ पीड़ित इलाके में भूसा का वितरण नहीं किया गया है। जिन्हें भूसा नहीं मिला है, उन्हें चिह्नित कर भूसा वितरित किया जाए, इसकी उन्होंने सोनपुर अंचलाधिकारी से अपील की है। उन्होंने मांग की कि जो माल-मवेशी गांव में ही रह गए हैं, उनके लिए भी चारे की व्यवस्था की जाए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा आगामी 15 सितंबर को बाढ़ पीड़ितों को दी जाने वाली राशि के लिए सारण जिला प्रशासन से मांग है कि बाढ़ग्रस्त प्रत्येक परिवार को यह राशि मिलनी चाहिए। कहा कि बीते दो दिन पूर्व एसडीएम कार्यालय में हुई बैठक में भी उन्होंने यह मांग रखी थी। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से लगभग 40 प्रतिशत बाढ़ पीड़ितों को फसल क्षति की राशि नहीं मिल पा रही है, जबकि पहले उन्हें यह राशि मिला करती थी।

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