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छह पंचायतों की कार्यशाला में जल संरक्षण व् जर्जर भवनों की मरम्मत पर जोर

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के सिंगपुर पंचायत सचिवालय में 22 अगस्त को विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में छह पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, पंचायत कर्मियों एवं वार्ड सदस्यों की उपस्थिति रही।

बताया जाता है कि कार्यशाला में सिंगपुर, बगदा, टांगटोना, मुरहुलसुदी, खैराचातर एवं हिसीम पंचायत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, वर्षा जल के सुरक्षित भंडारण तथा पुराने एवं जर्जर सरकारी भवनों की मरम्मत से संबंधित योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

आयोजित कार्यशाला में कहा गया कि पंचायत स्तर पर स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं का चयन किया जाए, ताकि उसका सीधा लाभ ग्रामीणों को मिल सके। जल संरक्षण के लिए वर्षा जल को रोकने, तालाब, सोख्ता एवं अन्य जल संचयन संरचनाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। साथ ही पुराने और जर्जर पक्के सरकारी भवनों को चिह्नित कर आवश्यक मरम्मत कराने की बात कही गई।

इस अवसर पर खैराचातर पंचायत के मुखिया विजय कुमार जायसवाल ने कहा कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल है। बारिश के पानी को बेकार बहने देने के बजाय पंचायत स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से उसका संरक्षण किया जाना चाहिए। तालाब, सोख्ता एवं अन्य जल संचयन संरचनाओं के माध्यम से पानी को सुरक्षित रखने से भविष्य में जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों को मिलकर काम करना होगा।

टांगटोना पंचायत की मुखिया सुमित्रा कुमारी ने कहा कि विकसित भारत-जी राम जी योजना के माध्यम से पंचायतों में विकास कार्यों को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। जल संरक्षण के साथ पुराने एवं जर्जर सरकारी भवनों की मरम्मत का प्रावधान भी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का चयन स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाए, ताकि इसका लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

पंचायत समिति सदस्य विनोद कुमार ने कहा कि जल संरक्षण से जुड़ी ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिसका सीधा लाभ ग्रामीणों को मिले। वर्षा जल को अधिक से अधिक संग्रहित करने और भू-जल स्तर को बनाए रखने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों, कर्मियों और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। हिसीम पंचायत के पंचायत समिति सदस्य जागेश्वर मुर्मू ने कहा कि गर्मी के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए अभी से जल संचयन की ठोस व्यवस्था करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत जल संरक्षण से संबंधित कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए।

पंचायत सचिव गौतम कुमार ने कहा कि पंचायत स्तर पर पुराने एवं जर्जर सरकारी भवनों की पहचान कर उनकी मरम्मत के लिए योजना तैयार करना जरूरी है। सरकारी भवनों का संरक्षण होने से पंचायतों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। उन्होंने जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन की जानकारी भी दी। इमरोज अहमद ने कहा कि विकसित भारत-जी राम जी योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को मजबूत करना है। जल संरक्षण और सरकारी भवनों की मरम्मत जैसे कार्य सीधे ग्रामीणों की जरूरतों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि योजनाओं का चयन गांव की वास्तविक जरूरतों के आधार पर किया जाना चाहिए। धरनीधर सिंह ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भागीदारी भी जरूरी है।

पंचायत स्तर पर सामूहिक कार्ययोजना बनाकर जल स्रोतों एवं वर्षा जल का संरक्षण किया जा सकता है। गीता देवी ने कहा कि पंचायतों में संचालित योजनाओं की जानकारी आम ग्रामीणों तक पहुंचाना आवश्यक है। ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी मिलने से जरूरतमंद परिवार इसका लाभ ले सकेंगे और विकास कार्यों में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी।
रोजगार सेवक पदमलोचन गोराई ने कहा कि योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देने से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बेहतर करने में मदद मिलेगी। अनिल कुमार महतो ने कहा कि पंचायतों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग किया जाना चाहिए।

बारिश के पानी को रोककर उसका उपयोग सिंचाई एवं अन्य ग्रामीण जरूरतों में किया जा सकता है। अकलेश्वर रजवार ने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों को योजनाओं की जानकारी मिली है। योजनाओं को धरातल पर प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए जनप्रतिनिधियों और पंचायत कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। ओम नायक ने कहा कि पुराने एवं जर्जर सरकारी भवनों की मरम्मत का प्रावधान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए काफी उपयोगी है।

भवनों की मरम्मत होने से सरकारी कार्यों के संचालन में सुविधा होगी और सरकारी संपत्ति भी सुरक्षित रहेगी। दशरथ बेदिया ने कहा कि जल संरक्षण को लेकर पंचायत स्तर पर रहिवासियों को जागरूक करने की जरूरत है। बारिश के पानी को समय रहते सुरक्षित किया जाए तो गर्मी के दिनों में होने वाली पानी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कार्यशाला में छहों पंचायतों के वार्ड सदस्य, पंचायत प्रतिनिधि, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक एवं अन्य संबंधित कर्मी मौजूद रहे। बैठक में पंचायत स्तर पर जल संरक्षण तथा जर्जर सरकारी भवनों की मरम्मत से संबंधित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तैयार करने पर सहमति बनी।

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