क्राइम ब्रांच ने दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट
कार्यालय संवादाता/मुंबई। जोगेश्वरी पूर्व स्थित शंकरवाड़ी के झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण(एसआरए) पुनर्विकास परियोजना से जुड़े कथित 1,000 करोड़ रुपये के वित्तीय धोखाधड़ी मामले में नया मोड़ आया है। मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किया है। हालांकि जांच में शिकायतकर्ता के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर है।
शंकरवाड़ी पुनर्विकास परियोजना से जुड़ा विवाद
यह मामला जोगेश्वरी पूर्व के शंकरवाड़ी में एसआरए पुनर्विकास परियोजना से संबंधित है। विवाद का प्रमुख केंद्र JLS Realty Pvt. Ltd. और उसकी मूल कंपनी Shajas Developers Pvt. Ltd. के स्वामित्व तथा नियंत्रण को लेकर था। शिकायतकर्ता राजत झुनझुनवाला की ओर से आरोप लगाया गया था कि उनकी कंपनी Gauri Rajeshwari Consultancy Pvt. Ltd. ने शेयर खरीद समझौते के माध्यम से Shajas Developers का पूरा स्वामित्व हासिल किया था। उनका दावा था कि बाद में कथित जाली दस्तावेजों और शेयर प्रमाणपत्रों के जरिए उनका नियंत्रण समाप्त कर दिया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 6 मई 2016 को शेयर खरीद समझौता किया गया था। लेकिन क्राइम ब्रांच की जांच में कथित तौर पर यह सामने आया कि सौदे को अंतिम रूप देने के लिए जरूरी शर्तें पूरी नहीं हुई थीं। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, सहमत राशि एस्क्रो खाते में जमा किए जाने का दस्तावेजी प्रमाण नहीं मिला। शेयरों के वैधानिक हस्तांतरण की निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी होने के पर्याप्त प्रमाण भी नहीं मिले। जांच एजेंसी ने इन्हीं तथ्यों को अपने निष्कर्ष का आधार बनाया।
धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों पर पुलिस का निष्कर्ष
शिकायत में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप लगाए गए थे। हालांकि, पुलिस के अनुसार उपलब्ध साक्ष्य इन आरोपों को पुष्ट करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। जांचकर्ताओं ने यह भी कहा कि अदालत से शिकायत दर्ज कराने के निर्देश मांगते समय शेयर खरीद समझौते और शेयर प्रमाणपत्रों की स्थिति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी सामने नहीं रखी गई थी। यह सब पुलिस की जांच के निष्कर्ष हैं , इन्हें अदालत के अंतिम फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। क्राइम ब्रांच की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद मामले की आगे की स्थिति अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। अदालत रिपोर्ट स्वीकार कर सकती है या कानून के अनुसार आगे की जांच अथवा अन्य उचित कार्रवाई का निर्देश दे सकती है। फिलहाल उपलब्ध समाचार रिपोर्ट से यह पुष्टि नहीं होती कि अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर मामले को अंतिम रूप से बंद कर दिया है। परियोजना में रहने वाले झुग्गीवासियों के पुनर्वास और पुनर्विकास की वर्तमान स्थिति पर भी अलग से आधिकारिक जानकारी की जरूरत है।
Tegs: #New twist in the alleged Rs 1,000 crore SRA fraud case
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