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काली काली अलकों पर पर्दा क्यों डाले, हमें जिन्दा रहने दो ये मुरली वाले

कब्बाली गीत से गूंज उठा सोनपुर मेला का सांस्कृतिक पंडाल

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला के नखास स्थित पर्यटन विभाग के मुख्य सांस्कृतिक पंडाल के मंच पर 11 नवंबर को सुरभि कला मंच सोनपुर सहित राज्य के विभिन्न कला टीमों द्वारा दिवाकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत एक से बढ़कर एक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की गई।

इस अवसर पर सुप्रसिद्ध गायक आशीष कुमार ने कब्बाली आधारित भक्ति गीत काली -काली अलकों पर पर्दा क्यों डाले, हमें जिंदा रहने दो ये मुरली वाले” पर दर्शक-श्रोता जमकर झूमें।

सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग की ओर से 11 नवंबर की प्रथम प्रस्तुति सुरभि कला मंच की रही, जिसमें अरविंद कुमार और नूतन की जोड़ी ने डोमकछ नृत्य अनार कली डोमरी तोहार डोम कहां गइले पर दर्शकों को खूब झुमाया। इसी जोड़ी ने स्वच्छता – सफाई पर आधारित गीतों पर युगल नृत्य भी किए। साथ हीं स्वच्छता का संदेश प्रसारित किया। रागिनीश्री ने गणेश वंदना सुन लो विनती हमारी, करके मूस की सवारी, जब आई होली – दिवाली ले अइहो चुनरी लाली और लोक कवि भिखारी ठाकुर के रचित गीत पिया गईले कलकतवा ए सजनी को दर्शकों ने तालियों के साथ स्वागत किया।

गायक गौरव सिंह ने ट्रैक सॉन्ग में दो गानों की प्रस्तुति की जिसमें वो लड़की बड़ी याद आती है और विजय यादव की कांधे पर बंदूकियां लेकर चला रे सीमान पर तथा पटना से पाजेब बलम जी, आरा से होठ लाली ने दर्शकों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन उद्घोषक प्रसिद्ध रंगकर्मी बिट्ठलनाथ सूर्य कर रहे थे। दूसरी प्रस्तुति सारण जिला प्रशासन एवं कला संस्कृति युवा विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में छपरा के रंजीत गिरि एंड टीम द्वारा कई आकर्षक गीत की प्रस्तुति की गई, जिसमें गणेश वंदना, देवी पचरा राम जी रतनवा देना आदि शामिल हैं।

इनके साथ बैंजो पर रवि मास्टर, तबला पर सत्येन्द्र चौबे, झांझ पर हरेश ओझा संगत कर रहे थे। सोनी कला मंच के हारमोनियम पर राम बहादुर सिंह, नाल पर भोला एवं राजू कुमार आदि संगत कर रहे थे। मंच पर तीसरी प्रस्तुति जिला प्रशासन सारण की ओर से राजधानी पटना के लोकगीत गायक आशीष कुमार की टीम ने अपनी गीत गंवनई से दर्शकों का दिल जीत लिया। यहां सर्वप्रथम गणेश वंदना, कृष्ण वंदना, देवी गीत आदि की प्रस्तुति भी जानदार रही।

आशीष कुमार के कब्बाली आधारित गीत काली -काली अलकों पर पर्दा क्यों डाले, हमें जिंदा रहने दो ये मुरली वाले पर दर्शक -श्रोता खूब झूमें। इनके द्वारा गाए गए देवी भजन देवी भइले डुमरी के हो फूल, जहां जिक्र भोले नाथ का होता है आदि पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाई। मंच संचालन उद्घोषक विट्ठल नाथ सूर्य कर रहे थे।

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