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बड़ाजामदा के आवासीय क्षेत्रों में हल्की वर्षा के बाद जल जमाव की स्थिति

अधिक वर्षा होने पर बडा़जामदा में आ जाती है बाढ़-शंभू पासवान

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में बडा़जामदा क्षेत्र में हल्की बारिश के बाद सड़को पर जल जमाव से क्षेत्र के राहगीर व् रहिवासी परेशान हाल है।

बताया जाता है कि बडा़जामदा बाजार, थाना, बोर्डर, फुटबॉल मैदान, टंकीसाई, भठ्ठीसाई समेत तमाम क्षेत्र, स्टेशन रोड आदि तमाम आवासीय क्षेत्र की सड़कें हल्की वर्षा होने के बाद तालाब व दलदल में तब्दिल हो जाती है। ऐसी स्थिति में यहाँ के रहिवासी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो जाते हैं। यहां जल जमाव की समस्या दशको पुरानी है। इस समस्या का अबतक स्थायी समाधान नही हो सका है।

उक्त तथ्यों को 12 सितंबर को नोवामुंडी के पूर्व जिला परिषद सदस्य सह अध्यक्ष भाजपा जिला अनुसूचित जाति मोर्चा शंभू हाजरा उर्फ़ शंभू पासवान ने बताते हुए कहा कि बडा़जामदा को लौहांचल का औद्योगिक नगरी भी कहा जाता है। पांच वर्ष पूर्व तक बडा़जामदा क्षेत्र में 200 से अधिक लौह अयस्क क्रेशर, दर्जनों वैद्य-अवैध खदानें संचालित थी। कहा कि बडा़जामदा रेलवे साइडिंग से लेकर सड़क मार्ग से प्रतिदिन हजारों टन लौह अयस्क भेजा जाता था। सभी बड़ी कंपनियों के कार्यालय यहाँ स्थित था।

इसके बावजूद यहाँ की सड़कें, गलियां, नाली, पानी निकासी की व्यवस्था आदि किसी प्रकार का कोई विकास नहीं किया जा सका। कहा कि स्कूली बच्चों व आम रहिवासियों को अपने घर से बाहर निकलकर अन्यत्र पैदल या वाहन से जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कहा कि सड़क पर जमे जल जमाव के कारण थोडी़ देर में हीं कपड़ा व शरीर लाल रंग में रंग जाता है। अगर वर्षा नहीं हुआ तो वाहनों के परिचालन से उड़ने वाला धूल कण रहिवासियों को जीने नहीं देता। दुकान में रखे खाद्य सामग्री गंदा हो जाता है, जिसे ग्राहक खरीदने से परहेज करने लगते हैं।

शंभू पासवान के अनुसार शांति समिति की बैठक में हर बार यह मामला उठता है। पूर्व एसडीओ ने कहा था कि यहाँ नाली व बेहतर ड्रेनेज सिस्टम बनाकर जल जमाव को खत्म कर दिया जायेगा, बावजूद इसके आज तक नाली अथवा पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि अधिक वर्षा होने पर बडा़जामदा में बाढ़ आ जाता है, क्योंकि पानी निकासी की कोई समुचित व्यवस्था तक नहीं है।

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