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वैशाली जिले के फतेहपुर में पहली बार वीर बाल महोत्सव में चार बलिदानियों को किया नमन

गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। कला, संस्कृति एवं युवा संस्कृति विभाग बिहार सरकार तथा वैशाली जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में जिला के हद में राघोपुर प्रखंड के फतेहपुर में 10 जनवरी को वीर बाल दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सीख पंथ के अनुयायी शामिल हुए।

ज्ञात हो कि पहली बार वीर बालक महोत्सव का भव्य आयोजन राघोपुर प्रखंड परिसर में किया गया। यह आयोजन सिख इतिहास के महान योद्धा एवं धर्मरक्षक गुरु गोविंद सिंह तथा उनके चार साहबजादों के अद्वितीय त्याग और बलिदान की स्मृति में समर्पित रहा।

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन बोधगया शंकराचार्य मठ के विवेकानंद गिरि महाराज, हरिहर क्षेत्र सोनपुर के मौनी बाबा, नमामि गंगे के प्रदेश सह संयोजक गौतम सिंह, महेंद्र पाल सिंह ढिल्लन, विनोद यादव एवं आनंदजी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। उद्घाटन के उपरांत राष्ट्रगीत की भावपूर्ण प्रस्तुति की गई, जिससे कार्यक्रम का वातावरण राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत एवं अत्यंत प्रेरणादायक बन गया।

इस अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत माता महारानी स्थान फतेहपुर से भव्य शोभायात्रा के साथ हुई, जो प्रखंड कार्यालय राघोपुर तक गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय रहिवासियों की सहभागिता रही, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह एवं उल्लास का माहौल व्याप्त हो गया।इसके पश्चात आयोजित घुड़सवारों का प्रदर्शन अत्यंत आकर्षक एवं रोमांचक रहा, जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा। इसी क्रम में सिख योद्धाओं द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक शौर्य प्रदर्शन ने उपस्थित जनों का मन मोह लिया और कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

वीर बाल कार्यक्रम के दौरान दंगल प्रतियोगिता का भी भव्य आयोजन किया गया, जिसमें राज्य सहित अन्य राज्यों से आए पहलवानों ने भाग लेकर अपने कौशल एवं दमखम का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया तथा कार्यक्रम को यादगार बना दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सरकार के स्तर पर पहली बार इस महोत्सव का आयोजन किया गया है, जो राघोपुरवासियों के लिए गौरव की बात है।

वक्ताओं ने सिख धर्म के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंहजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने धर्म, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए अपने पूरे परिवार को समर्पित कर दिया। उनके चार पुत्र क्रमशः अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह एवं फतेह सिंह ने अत्यंत अल्पायु में धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान किया। विशेष रूप से सबसे छोटे साहबजादे फतेह सिंह के सम्मान में फतेहपुर गांव का नामकरण किया गया, जिसकी स्मृति में इस महोत्सव का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर मौनी बाबा ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह के पुत्रों का बलिदान आज भी समाज को सत्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। निषाद सनातन सिख सभा के प्रदेश अध्यक्ष त्रिलोकी सिंह निषाद एवं अन्य वक्ताओं ने भी चार साहबजादों को नमन करते हुए युवा पीढ़ी से उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया।

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