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अनुसूचित जाति आयोग का पुनर्गठन समय की आवश्यकता-विजय शंकर नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। अनुसूचित जाति आयोग का शीघ्र पुनर्गठन समय की आवश्यकता है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर अध्यक्ष एवं अन्य रिक्त पदों पर नियुक्ति का झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने आग्रह किया है।

प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 7 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड राज्य अनुसूचित जाति आयोग का शीघ्र पुनर्गठन करने तथा अध्यक्ष एवं अन्य रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ करने का आग्रह किया है। उन्होंने सीएम को भेजे गये ईमेल संदेश में कहा है कि अनुसूचित जाति आयोग राज्य के अनुसूचित जाति समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, अत्याचार एवं भेदभाव से संबंधित मामलों की निगरानी, शिकायतों के निस्तारण तथा सरकार को आवश्यक सुझाव देने वाली एक महत्वपूर्ण संवैधानिक भावना से प्रेरित संस्था है। ऐसे में आयोग का पूर्ण रूप से सक्रिय रहना सामाजिक न्याय की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा है कि अध्यक्ष एवं अन्य पद लंबे समय से रिक्त रहने के कारण आयोग अपेक्षित रूप से कार्य नहीं कर पा रहा है। इससे अनुसूचित जाति समाज के अनेक आम व् खास को अपनी शिकायतों के त्वरित समाधान एवं संस्थागत सहायता प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पर रहा है। राज्य में सामाजिक न्याय को और अधिक सशक्त बनाने के लिए आयोग का पुनर्गठन आवश्यक है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने पत्र में उल्लेख किया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 एवं अनुच्छेद 46 सामाजिक समानता, सम्मान तथा अनुसूचित जातियों के हितों के संरक्षण की स्पष्ट व्यवस्था करते हैं। इन संवैधानिक उद्देश्यों की प्रभावी पूर्ति के लिए एक सक्रिय एवं सक्षम राज्य अनुसूचित जाति आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार सामाजिक न्याय एवं वंचित वर्गों के अधिकारों के प्रति सदैव संवेदनशील रही है। इसी विश्वास के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री से आयोग का अविलंब पुनर्गठन करते हुए अध्यक्ष एवं अन्य रिक्त पदों पर योग्य व्यक्तियों की नियुक्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

नायक ने कहा है कि एक सशक्त एवं सक्रिय अनुसूचित जाति आयोग न केवल शिकायतों के त्वरित निस्तारण में सहायक होगा, बल्कि अनुसूचित जाति समाज का शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य सरकार इस विषय पर सकारात्मक एवं शीघ्र निर्णय लेकर सामाजिक न्याय को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करेगी।

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