सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। सेल के झारखंड ग्रुप ऑफ माइंस (जेजीओएम) में सुरक्षा संस्कृति को और मजबूत बनाने तथा खनन कार्यों में सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बीते 13 मार्च को सेफ्टी प्रैक्टिस पर परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट वर्कशॉप (पीआईडब्ल्यू) का आयोजन किया गया।
जानकारी के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में किरीबुरू स्थित लर्निंग एंड डेवलपमेंट सेंटर (एलएंडडीसी) में आयोजित उक्त कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य खदानों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा कार्यप्रणाली में सुधार के माध्यम से दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड ग्रुप ऑफ माइंस के महाप्रबंधक (ईएंडएल) एवं नोडल सेफ्टी ऑफिसर मनोज कुमार की उपस्थिति में किया गया। कार्यशाला में कहा गया कि खनन कार्य अत्यंत जोखिमपूर्ण होता है, इसलिए हर स्तर पर सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन अनिवार्य है। कहा गया कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका सही तरीके से पालन करना भी उतना ही जरूरी है। निरंतर प्रशिक्षण, सतर्कता और टीम वर्क से ही सुरक्षित कार्य वातावरण बनाया जा सकता है।

कार्यशाला के दौरान डिप्टी जनरल मैनेजर (एचआर व् एलएंडडी) रथिन बिश्वास ने हाल के समय में हुई दुर्घटनाओं से जुड़े केस स्टडी प्रस्तुत करते हुए उनके कारणों और रोकथाम के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं एमआईओएम के सेफ्टी ऑफिसर मानस रंजन राउत ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसका पालन सुरक्षित खनन के लिए बेहद आवश्यक है।
इस अवसर पर एचआर व् एलएंडडी के सहायक प्रबंधक एवं एवीटीओ असनंदा श्रीकांत के नेतृत्व में दुर्घटना विश्लेषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर समूह चर्चा किया गया। कार्यशाला में किरीबुरू, मेघाहातुबुरू, गुवा और मनोहरपुर की खदानों से कुल 44 अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया तथा सुरक्षित कार्य संस्कृति को मजबूत बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
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