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नवंबर क्रांति ने दुनिया को दिया था उपनिवेशवाद के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा-माकपा

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में जरंगडीह स्थित जे. के. बोस भवन में 7 नवंबर को नवंबर क्रांति ( रूसी क्रांति) मनाया गया।

रुसी क्रांति की 107वीं वर्षगांठ के अवसर पर माकपा बेरमो लोकल कमिटी के तत्वावधान में जरंगडीह स्थित जे .के .बोष भवन में परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीटू तथा सीपीएम नेता श्यामबिहारी सिंह दिनकर ने की।

इस अवसर पर पार्टी राज्य कमिटी सदस्य कॉमरेड रामचंद्र ठाकुर, जिला सचिव सह राज्य कमिटी सदस्य कॉ भागीरथ शर्मा तथा सीटू नेता विजय भोई ने परिचर्चा पर बोलते हुए कहा कि मानव सभ्यता के इतिहास में दुनिया में पहली बार 7 नवंबर 1917 को विश्व सर्वहारा के महान नायक कॉ ब्लादिमीर इलीच लेनिन के नेतृत्व में सोवियत रूस में बोल्शेविक क्रांति के माध्यम से मजदूर वर्ग की सत्ता कायम हुई। जिसे प्रथम साम्यवादी क्रांति भी कहा जाता है। यह एक नए समाजवादी समाज की स्थापना के लिए मजदूरों, किसानो तथा अन्य शोषित तबकों की प्रथम सफल क्रांति थी।

इस क्रांति ने हमारे देश भारत सहित पुरी दुनिया में उपनिवेशवाद से गुलामी के खिलाफ आम जनों को अपने देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया और एशिया व अफ्रीका में चल रहे राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलनों को एक नई उर्जा प्रदान की। कहा गया कि इस क्रांति ने मानवता को यह दिखाया कि पूंजीवाद का अंत कर समाजवादी समाज का निर्माण किया जा सकता है। कहा गया कि वर्ष 1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने जिस तीन नारों स्वतंत्रता, समानता व् भाईचारा का नारा दिया था उसे मूर्त रूप देने का प्रयास पेरिस कम्यून से होते हुए सोवियत संघ में सफल रहा और शोषण विहिन समाज के निर्माण की आधारशीला रखी।

कहा गया कि आज वित्तीय पूंजी के दौर में नव- उदारवाद व् साम्राज्यवाद गंभीर संकट के दौर मे है। इसी के गर्भ से नव-फासीवाद पैदा हुआ है। दुनिया भर के क्रांतिकारियों को मार्क्सवाद- लेनिनवाद की क्रांतिकारी शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए और पूर्व की कमजोरियों जिसके चलते सोवियत संघ में समाजवाद का पराभव हुआ उससे शिक्षा लेते हुए 21वीं सदी में समाजवाद के सपने को साकार करने के लिए आगे बढ़ना होगा। हम समाजवादी क्रांति के 108वीं वर्षगांठ पर यह शपथ लें कि भारत के मेहनतकशों को संगठित कर उनके संघर्षों को आगे ले जाएंगे।

परिचर्चा में श्रमिक नेता शकील आलाम ने भी परिचर्चा में भाग लेते हुए नवम्बर क्रांति के महत्व को रेखांकित किया। इसके अलावे अख्तर खान, कमलेश गुप्ता, मनोज पासवान एवं चंद्रशेखर महतो ने भी विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम व् परिचर्चा में मुख्य रूप से माया देवी, लक्ष्मी देवी, समीर सेन, सीबू तांती, राजू साव, सुरेश प्रसाद सहीत दर्जनों गणमान्य उपस्थित थे।

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