Advertisement

बेरोजगारो को ठेकेदारी कार्य में आरक्षण के वादे की अवहेलना न करे सरकार-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के आदिवासी एवं मूलवासी समाज के बेरोजगार युवाओं को ठेकेदारी कार्यों में आरक्षण देने के वादे की अवहेलना ना करे सरकार। अपने वादे पुरी करे राज्य की हेमंत सोरेन सरकार।

उपरोक्त बाते 12 सितंबर को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने झारखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव को पत्र लिख कर चेतावनी दी है। पत्र में नायक ने कहा है कि यह पत्र न केवल एक स्मरण पत्र है, बल्कि सरकार द्वारा किए गए वादों की धज्जियां उड़ाने वाली सरकार की लापरवाही एवं विश्वासघात पर एक कड़ा प्रहार है।

उन्होंने कहा कि सीएम को याद होगा कि मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने के समय एवं विभिन्न सार्वजनिक सभाओं में बार-बार घोषणा की गयी थी कि आदिवासी एवं मूलवासी समाज के बेरोजगार युवाओं को ठेकेदारी कार्यों (जैसे निर्माण, विकास योजनाओं एवं सरकारी ठेकों) में आरक्षण प्रदान किया जाएगा। यह वादा झारखंड के मूल रहिवासियों के सशक्तिकरण एवं रोजगार के अधिकार को मजबूत करने का प्रतीक था।

नायक ने कहा कि आदिवासी समाज, जो झारखंड की लगभग 26 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है एवं मूलवासी जो राज्य की सांस्कृतिक धरोहर है। लंबे समय से सरकारी योजनाओं के ठेकेदारी कार्यों में बहिष्कृत रहा है। बाहरी ठेकेदारों एवं गैर-मूल रहिवासियों द्वारा इन अवसरों पर कब्जा जमाए जाने से राज्य के युवा भटकाव की ओर धकेल दिए गए हैं। कहा कि मुख्यमंत्री का यह वादा हमें उम्मीद की किरण लगी थी, लेकिन आज 12 सितंबर तक, एक भी कदम नहीं उठाया गया है। यह न केवल वादा खिलाफी है, बल्कि आदिवासी, मूलवासी समाज के साथ घोर अन्याय एवं अपमान भी है।

पत्र में नायक ने कहा कि यह कैसी सरकार है जो अपने ही जनमानस को आर्थिक समृद्धि से लटका कर रखती है? क्या यह आपकी और दिशोम गुरु की पार्टी जेएमएम की प्राथमिकताएं हैं कि बाहरी पूंजीपतियों एवं ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए आदिवासी मूलवासी युवाओं का भविष्य दांव पर लगाया जाए? उन्होंने कहा कि झारखंड की मिट्टी से निकले युवा, जो बेरोजगारी की चपेट में तड़प रहे हैं, सरकार के वादों पर भरोसा का इंतजार कर रहे हैं। बदले में उन लाखो युवा को मिला है केवल निराशा एवं धोखा।

यह लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित उपेक्षा है, जो आदिवासी मूलवासी समाज को हाशिए पर धकेलने का प्रयास है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। कहा कि यदि तत्काल ठेकेदारी कार्यों में एसटी/एससी और मूलवासी समाज को नियुक्त की तरह को 50 प्रतिशत आरक्षण लागू नहीं किया गया, तो मंच पूरे राज्य में आंदोलन छेड़ देगा, जो सरकार के लिए कलंक साबित होगा।

नायक ने कहा कि देश के अन्य राज्य कैसे अपने आदिवासी एवं दलित मूलवासी भाइयों के प्रति संवेदनशील हैं। उदाहरण के तौर पर ओडिशा राज्य जहां ठेकेदारी एवं निर्माण कार्यों में एसटी/एससी को 20 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाता है। राज्य सरकार की ओडिशा कंस्ट्रक्शन वर्कर्स एक्ट के तहत ठेकेदारों को अनिवार्य रूप से आरक्षित कोटा में आदिवासी युवाओं को प्राथमिकता देनी पड़ती है। छत्तीसगढ़ राज्य जहां छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग के नियमों के अनुसार, सरकारी ठेकों में एसटी/एससी उप ठेकेदारों को 25 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है।

इसके अलावा केंद्रीय स्तर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2018 में ही निर्देश जारी किए थे कि ठेकेदारी एवं अंशकालिक सरकारी नौकरियों में एससी/एसटी/ओबीसी को आरक्षण अनिवार्य हो। उन्होंने मांग करते हुए कहा हैं कि राज्य में ठेकेदारी कार्यों में एसटी/एससी मूलवासी को 50 प्रतिशत आरक्षण की तत्काल अधिसूचना जारी करें। बेरोजगार आदिवासी युवाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण एवं पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करें। पिछले वादों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करें।
पत्र में नायक ने कहा है कि यदि 15 दिनों के अंदर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो मंच राज्यव्यापी प्रदर्शन एवं कानूनी कदम उठाएगा। आदिवासी समाज का धैर्य अब सीमा पर है।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *