Advertisement

गंगाजल बड़का बगीचा में गायत्री हवन यज्ञ संपन्न

हवन यज्ञ से है होती मन, अंतरात्मा एवं वातावरण की शुद्धि

अवध किशोर शर्मा/सोनपुर (सारण)। सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के गंगाजल बड़का बगीचा गांव में 23 मार्च को मन, अंतरात्मा और वातावरण को शुद्ध करने के लिए गायत्री हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। हवन यज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु गण शामिल हुए।

हवन या हवन-पूजा भक्तों द्वारा अपने उपासक की आराधना के लिए किया जाने वाला यज्ञ ही है। हवन और हवन पूजा से मन, अंतरात्मा की शुद्धि के साथ-साथ वातावरण भी पवित्र एवं शुद्ध हो जाता है। हवन यज्ञ के समय “ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुरवरेण्य भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात” मंत्र से इस दौरान सारा इलाका गूंज रहा था।

चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन सत्येन्द्र मिश्रा सदन परिसर में अखिल विश्व गायत्री परिवार के बाबा हरिनाथ प्रज्ञा मंडल खरीका सोनपुर द्वारा आयोजित गायत्री हवन यज्ञ में बड़ी संख्या में भक्त गण शामिल हुए।

इस अवसर पर स्थानीय रहिवासी शंभू सिंह, रविन्द्र सिह, पशुपति गिरि, कामेश्वर महतो के अतिरिक्त सोनपुर प्रखंड के साहित्यकार सारंगधर प्रसाद सिंह, अधिवक्ता समरजीत कुमार सिंह, नवल किशोर सिंह, सुरेश सिंह, मोहन राय, प्रजापति किरण सहित बड़ी संख्या गणमान्य मौजूद थे। इस गायत्री हवन यज्ञ में सर्वाधिक महिलाओं की भागीदारी रही।

इस अवसर पर क्षेत्र के साहित्यकार सारंगधर सिंह ने बताया कि हवन, अग्नि के द्वारा देवी देवताओं को उनकी प्रिय वस्तु पहुंचाने का एक तरीका है। उन्होंने कहा कि ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुरवरेण्य भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात में बताया गया है कि ॐ आध्यात्मिक गुरु ब्रह्मा हैं।

आध्यात्मिक गुरु विष्णु हैं। आध्यात्मिक गुरु देवता हैं। आध्यात्मिक गुरु महेश्वर हैं। आध्यात्मिक गुरु परम ब्रह्म हैं। मैं उन्हें सम्मानपूर्वक प्रणाम करता हूं।

इस मौके पर हवन करने से पूर्व स्वच्छता का ध्यान रखा गया। हवन पूजा और यज्ञ हवन आदि सभी धार्मिक अनुष्ठान कार्य नहा-धोकर, साफ कपड़े पहनकर, स्वच्छ और शुद्ध मन से किया गया। हवन के लिए सबसे पहले अग्नि की स्थापना की गई।

इसके बाद आम की चौकोर लकड़ी लगाकर, उसपर कपूर रखकर अग्नि प्रज्वलित कर मां गायत्री का आह्वान किया गया। दीप प्रज्वलित से लेकर भोग लगाने तक हर कार्य मंत्र उच्चारण के जरिए किया गया। मंत्र उच्चारण के साथ अनेकों आहुतियां दी गयीं। अंत में पूर्णाहुति के साथ हवन संपन्न हो गया।

साक्षात गायत्री मां की पूजा करने के लिए महाप्रज्ञा- ऋतम्भरा गायत्री का प्रतीक चित्र पूजा वेदी पर स्थापित किया गया था। साथ में कलश और घी का दीपक भी स्थापित किया गया। मंत्रजाप के जरिए गायत्री मां का आह्वान किया गया। श्रद्धा भावना के साथ की गयी गायत्री मां की उपासना बहुत फलदायी माना गया है।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *