एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस पर आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने संकल्प लिया तथा कहा कि भगवान बिरसा के सपने 25 वर्ष बाद भी अधूरे है, जिसे अब पूरा करने का समय आ गया है।
आदिवासी मूलवासी समाज के महान क्रांतिकारी भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिवस पर 15 नवंबर को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष नायक ने झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा चौक पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर नायक ने धरती आबा बिरसा मुंडा के दिखाए सपनों को साकार करने का संकल्प लिया और समाज से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 25 साल बाद भी बिरसा के सपने अधूरे हैं।
माल्यार्पण के पश्चात संबोधित करते हुए नायक ने कहा, कि भगवान बिरसा मुंडा ने जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। लेकिन दु:ख की बात है कि उनके बलिदान के 150 वर्ष तथा राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी उनके सपने आज भी अधूरे हैं। आज भी आदिवासी भाई-बहन विस्थापन, शोषण और अधिकारों से वंचित हैं। अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर बिरसा के सपनों को साकार करें।
नायक ने आगे कहा कि आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच बिरसा मुंडा के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और उनके अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करेगा। यह संकल्प हम सबका है। कार्यक्रम की मुख्य झलकियां माल्यार्पण एवं श्रद्धांजलि: बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि। इस अवसर पर आदिवासी समाज के युवा, महिला एवं बुजुर्गों की उपस्थिति में संकल्प सभा का आयोजन किया गया। जिसमें जल-जंगल-जमीन की रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार पर जोर दिया गया।
वहीं आदिवासी मुलवासी समाज को एकजुट होकर बिरसा के सपने साकार करने का आह्वान किया गया। नायक ने सभी आदिवासी एवं मूलवासी समुदायों से एक मंच पर आने और अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने का आग्रह किया। माल्यार्पण मे रंजीत उरांव, करमा लिंडा, दिपक राम, विक्की पाहन,आनन्द तांबा सहित दर्जनों गणमान्य उपस्थित थे।
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