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सीबीआई के हत्थे चढ़ा घूसखोर सीसीएल अधिकारी व् झामुमो नेता

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। घूसखोर अधिकारी और नेता किस प्रकार मजदूर के को लूटने का काम करते है और गठजोड़ बनाकर मजदूरों का शोषण करते है। इसका पर्दाफाश 17 अप्रैल को सीबीआई धनबाद की टीम ने किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बोकारो जिला के हद में सीसीएल कथारा क्षेत्र में शुक्रवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की धनबाद टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी स्ट्राइक करते हुए कथारा कोलियरी के वरीय प्रबंधक (मानव संसाधन) सुभाष चन्द्र पासवान और बिचौलिए की भूमिका निभा रहे झामुमो नेता सह एचएमकेयू क्षेत्रीय सचिव शमशुल हक को 35 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को स्थानीय अतिथि भवन ले जाया गया, जहाँ दोनों से घंटों गहन पूछताछ की गई।जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता सुरेश किस्कू के पिता कारू मांझी वर्ष 2024 में कथारा कोलियरी से सेवानिवृत्त हुए थे। रिटायरमेंट के बाद उनके बकाए भुगतान का मामला लंबित था। इस दौरान कारू मांझी का निधन हो गया, जिससे परिवार गहरे आर्थिक संकट में फंस गया। आरोप है कि जब सुरेश अपने पिता के हक की राशि के लिए दफ्तर पहुंचा, इस दौरान प्रबंधक पासवान ने फाइल आगे बढ़ाने के एवज में 35 हजार रुपये की मांग की।

वह अपने पिता की मृत्यु के बाद हक के लिए भटक रहा था कि मुर्गा समझ झामुमो नेता शमशुल हक ने भुगतान कराने के एवज में उससे खर्च करने शर्त रखी। परेशान सुरेश ने इसकी शिकायत सीबीआई (धनबाद) से की। शिकायत की पुष्टि के बाद, सीबीआई के एसपी डीएल मीणा के निर्देश पर डीएसपी प्रियरंजन के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई तथा योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया गया।

जैसे ही शिकायतकर्ता सुरेश किस्कू ने सीबीआई द्वारा उपलब्ध कराये गये राशि परियोजना कार्यालय में तय राशि अधिकारियों को सौंपी, पहले से तैनात सीबीआई की टीम ने धावा बोल दिया। टीम ने मौके पर ही कार्मिक प्रबंधक और उनके साथ मौजूद झामुमो नेता को दबोच लिया। साथ हीं उनके पास से रिश्वत के पैसे बरामद कर लिए गए।

इधर कथारा क्षेत्र में इस छापेमारी के बाद पूरे अधिकारियों और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है। स्थानीय रहिवासियों तथा कामगारों ने सीबीआई की इस कार्रवाई की तारीफ की है। हालांकि चर्चा यह भी है कि ऐसा ही एक और गुर्गा को इस रेड से बचने का मौका मिल गया है, अन्यथा वह भी सीबीआई के लपेटे में आ जाता। इस मामले के तार अन्य बड़े अधिकारियों से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसका खुलासा जांच के बाद ही संभव है।

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