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कवियों के स्वर से गूंज उठा बोकारो का शिबू सोरेन स्मृति भवन सभागार

भव्य कवि सम्मेलन में साहित्य, संवेदना और सामाजिक चेतना का भावनात्मक संगम

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। जिला प्रशासन बोकारो की पहल पर शिबू सोरेन स्मृति भवन (टाउन हॉल) में आयोजित शब्द सरिता महोत्सव भव्य कवि सम्मेलन, साहित्य, संवेदना और सामाजिक सरोकारों का जीवंत मंच बन गया। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ देश के प्रख्यात कवियों ने अपनी सशक्त एवं भावनात्मक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर 8 अक्टूबर को बोकारो जिला उपायुक्त अजय नाथ झा एवं पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने कवियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। शब्द सरिता महोत्सव के दूसरे दिन कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री पद्मिनी शर्मा द्वारा मां शारदे की वंदना से किया गया। आध्यात्मिक और साहित्यिक ऊर्जा से भरे इस आरंभ ने पूरे वातावरण को भाव विभोर कर दिया। देश के प्रसिद्ध लेखक-कवि निलोत्पल मृणाल ने कहा कि साहित्य समाज को नई दृष्टि देता है और ऐसे आयोजन निरंतर होने चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन बोकारो की इस पहल की सराहना की। उनके द्वारा किसान की मेहनत, मिट्टी और श्रम पर आधारित कविता-हम आकाश में गेहूँ बोएंगे… ने ग्रामीण जीवन की पीड़ा और स्वाभिमान को स्वर दिया।

वहीं, बचपन के खोते संसार पर आधारित कविता कहां गया, दिन वो सलोना रें… ने श्रोताओं की आंखें नम कर दीं। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे केवल वीडियो देखकर नहीं, बल्कि सकारात्मक माहौल में अध्ययन करें। आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में कविता केवल शब्दों का सौंदर्य नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं, जीवन-संघर्ष और सामाजिक यथार्थ का सशक्त माध्यम बनकर उभरी देश के प्रख्यात कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं को भावनात्मक, वैचारिक और आत्ममंथन की यात्रा पर ले गया।

यहां कवि द्वारा प्रस्तुत तीसरा गीत मानवीय संवेदनाओं और जीवन-दर्शन पर केंद्रित रहा। हे जादूगर, तुम्हारा घर कहां है ? और दुनिया मिट्टी का एक ढ़ेर है… जैसी पंक्तियों ने जीवन, माया और सत्ता के भ्रम पर गहरे प्रश्न खड़े किए। एक दिन सिर पर ताज होगा… जैसी पंक्तियों ने संघर्ष और आशा को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि निलोत्पल मृणाल के नौकरी पेशा जीवन की विडंबनाओं पर आधारित गीत विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कॉलेज के दिन याद करूं, तो लगता था चौहान और धीरे-धीरे लोहा पिघल गया.. जैसी पंक्तियों ने युवावस्था के सपनों और वर्तमान की कठोर सच्चाइयों को उजागर किया। अब रवैये की तलवार चली गई है – देखिए, सिकंदर नौकरी की वजह से हार गया… पर श्रोताओं ने तालियों के साथ गहरी सहमति जताई।

कवि की प्रस्तुति का सबसे मार्मिक हिस्सा उन युवाओं पर केंद्रित रहा, जिन्होंने अपने जीवन को संघर्ष की भट्ठी में तपाया। वे युवा जिन्होंने स्कूल की दीवारों पर दिल बनाए थे, वे जो चलते हुए तीर पर हंसे और उड़ते हुए तीर को खुद पर ले लिया… जैसी पंक्तियों ने प्रेम, साहस और बलिदान की गाथा कह दी। शब्द सरिता महोत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन केवल साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज का आईना बन गया। कविताओं ने प्रेम, पीड़ा, व्यंग्य, संघर्ष और उम्मीद – सभी भावों को एक साथ पिरोते हुए श्रोताओं के मन में गहरी छाप छोड़ी।

स्थानीय पत्रकार सह कवि रजत नाथ ने कभी दुखों का पहाड़ है, कभी आँसुओं का सागर… और बेसिन के शीशे पर चिपकी बिंदी जैसी रचनाओं से जीवन के सूक्ष्म भावों को मंच पर जीवंत कर दिया, जिस पर श्रोताओं ने तालियों की गूंज के साथ सराहना की। कवयित्री गीता कुमारी ने नववर्ष और बसंत ऋतु पर आधारित श्रृंगार रस की कविता जो तुम संग हो साजन मेरे, मेरा हर रंग बसंती है… प्रस्तुत कर प्रेम, सौंदर्य और उल्लास की अनुभूति कराई।

इस अवसर पर चास के डीसीएलआर प्रभास दत्ता ने बतौर कवि संघर्ष और आशा से भरी रचना सुनाई। उन्होंने निराशा ने रोका बहुत, तकलीफों ने टोका बहुत…, आज रूक रही है सांसें जरूर – आओ फिर जिंदगी सलाम…, पुरी तरह से उजड़ गया, लो मैं तुम्हारे ईश्क में फना हो गया… से श्रोताओं को प्रेरित किया। जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी शक्ति कुमार ने दैनिक जीवन से जुड़ी संवेदनशील कविताएं प्रस्तुत कीं। उन्होंने पाने के पत्ते – पालक की साग– दूध की कटोरी… और भीगा शहर – भीगी इमारत भीगा दिल… जैसी कविता पाठ कर खुब ताली बिटोरी।

कवि अमन अश्क की रचनाओं में सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदना मुखर रूप से उभरी। कहा कि लोहे की कीमत तो कमा ली, लेकिन सोना गंवा दिया… जैसी पंक्तियों ने श्रोताओं को गहन चिंतन में डुबो दिया। श्रृंगार रस की सशक्त कवयित्री पद्मिनी शर्मा ने प्रेम, संस्कृति और नारी संवेदना पर आधारित कविताओं से मंच को भावनाओं से भर दिया। बेटियों की शक्ति, मीरा की आस्था और भारतीय संस्कृति पर आधारित पंक्तियों ने गहरा प्रभाव छोड़ा।
इस अवसर पर चिन्मय विद्यालय की शिक्षिका ज्योती दूबे और छात्रा वैष्णवी ने जीवन की हार-जीत और संघर्ष को पक्षी की उड़ान के प्रतीक के माध्यम से प्रस्तुत कर जमकर सराहना बटोरी।

ज्ञात हो कि यह कवि सम्मेलन उपस्थित श्रोताओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया। कार्यक्रम ने यह सिद्ध किया कि कविता आज भी समाज को जोड़ने और सोचने की दिशा देने की शक्ति रखती है। इस अवसर पर जिला उपायुक्त अजय नाथ झा, उनकी धर्मपत्नी प्रतिमा झा, पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह, उनकी धर्मपत्नी दिव्या शर्मा, उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह भेंट किया। मौके पर उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। जबकि कार्यक्रम में सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी-कर्मी, आम व् खास रहिवासी आदि उपस्थित थे।

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