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मेला में बिहार सरकार की प्रदर्शनी बना कला, संस्कृति और विरासत का संगम

सिक्की कला-वेणु शिल्प कला की कलाकृतियों का भी प्रदर्शन

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला में लगे बिहार सरकार की कला संस्कृति एवं युवा विभाग की प्रदर्शनी कला, संस्कृति और विरासत का संगम बन गया है। इस प्रदर्शनी के अंदर मिथिला पेंटिंग , सिक्की कला, वेणु शिल्प कला सहित विभिन्न प्रकार के छोटे – बड़े 67 कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

अपनी खूबियों और खासियतों से देश और दुनिया में प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग से जुड़ी 21 कला- कृतियां प्रदर्शनी के पश्चिमी दीवार पर सुशोभित हो रही है। सभी कला कृति अपनी – अपनी गाथाएं बयां कर रही है। सभी एक से बढ़कर एक हैं और दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।

इसके अलावा प्रदर्शनी के इसी दीवार पर पायल कुमारी, तन्नू मिश्रा, सुधीर कुमार, संदीप कुमार, पुष्पा कुमारी, अंकुर कुमार, हर्ष राज एवं रूपेश कुमार द्वारा बनाई गई लघु तस्वीरें भी सजी हैं। दो बड़ी तस्वीरें मजहर इलाही एवं राजेश कुमार द्वारा बनाई गई है। सभी कलाकृतियां कलाकारों की बेहतरीन कला का नमूना कही जा सकती है।

प्रदर्शनी के पूर्वी दीवार पर भी पूरे एक दर्जन तस्वीरें शोभायमान हैं। इसके अलावा इसी साइड में सजा कर पंक्ति बद्ध रखे गए टेराकोटा कलाकृति सहित 14 कलाकृति भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना है। फाइबर और काष्ठ कला की कलाकृतियां भी प्रदर्शित है। इसके अलावा यहां वेणु शिल्प की 10 एवं सिक्की कला की चार कलाकृतियां शामिल हैं। मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी के स्टॉल पर मिथिला चित्रकला से आच्छादित टोपी सहित कई महिला उपयोगी वस्तुएं बिक रही हैं। प्रदर्शनी में उत्तर साइड दीवार पर दो तस्वीरें भी हैं।

प्रदर्शनी में एक विशिष्ट कलाकृति का भी प्रदर्शन किया गया है, जो कलम और स्याही की एक चित्रात्मक ड्राइंग है। इसके अलावा एक और कलाकृति श्रीराम क्रॉसिंग द गंगा का है। यह कलाकृति एक पारंपरिक भारतीय लोक-कला शैली में है, जो मिथिला कला का जीवंत रंगों और कथात्मक विषयों के लिए जानी जाती है। ये आकृतियां हिंदू महाकाव्य रामायण की हैं जिनमें भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और सीता आदि को दर्शाया गया है।

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