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बांकीपुर उपचुनाव: जन सुराज की संजीवनी और राजनीतिक अहंकार का पतन

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। बिहार की राजधानी पटना के बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम केवल एक सीट की जीत-हार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक सिस्मोग्राफिक (भूकंपीय) बदलाव हैं। जन सुराज की यह जीत उस संजीवनी के समान है, जिसने न केवल प्रशांत किशोर के अभियान को पुनर्जीवन दिया है, बल्कि राज्य की दशकों पुरानी राजनीतिक लकीरों को भी मिटा दिया है।

ज्ञात हो कि, बांकीपुर दशकों से भाजपा के लिए लंका जैसी अजेय दुर्ग रही है। एक ऐसी सीट जिसे पटना का राजनीतिक दुर्ग माना जाता था। पार्टी में व्याप्त यह अहंकार कि बांकीपुर कभी नहीं हारेगी, रावण के उस भ्रम के समान था, जिसमें उसे अपनी स्वर्ण लंका पर अटूट विश्वास था।

जनसुराज सुप्रीमो प्रशांत किशोर की दो वर्ष की पदयात्रा ने जन-मानस में जो आधार तैयार किया, वह लंका दहन की उस अग्नि के समान थी, जिसने भाजपा की अजेयता के मिथक को भस्म कर दिया। यह हार संगठन की कमजोरी नहीं, बल्कि अहंकार का पराभव है। वर्ष 2025 के बाद के दौर में जन सुराज एक वैचारिक आंदोलन के रूप में तो सक्रिय था, किंतु एक ठोस चुनावी जीत के अभाव में वह संशय के घेरे में था। बांकीपुर की जीत ने तीन स्तरों पर काम किया है।

प्रथमतः कार्यकर्ताओं की हताशा को उत्साह में बदला।जनता में यह स्थापित हुआ कि जन सुराज केवल एक बौद्धिक नारा नहीं, बल्कि एक विजेता विकल्प भी है। द्वितीय जैसे संजीवनी के बाद राम की विजय सुनिश्चित हो गई थी, वैसे ही यह जीत 2026-30 के आगामी बिहार विधानसभा महायुद्ध के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त (साइकोलॉजिकल एज) प्रदान कर रही है।

तथा तृतीय बांकीपुर के परिणाम राजद के लिए एक अंगद-रावण संवाद जैसी स्थिति लेकर आए हैं। राजद का पारंपरिक एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण और भाजपा-विरोधी वोट बैंक इस चुनाव में बिखर गया। जनता ने यह समझ लिया कि जब हनुमान (जन सुराज) जैसा सक्षम और विश्वसनीय योद्धा मैदान में है, तो (राजद) के पुराने और घिसे-पिटे समीकरणों पर वोट बर्बाद करने का कोई अर्थ नहीं है।

बांकिपुर का यह उप चुनाव स्पष्ट करता है कि बिहार अब भाजपा बनाम राजद की द्वंद्व-युद्ध की राजनीति से बाहर निकल चुका है। एक सशक्त तीसरा विकल्प होने पर 30 साल पुरानी जातियों और समीकरणों की राजनीति वैसे ही अप्रासंगिक हो जाती है, जैसे त्रेता युग में नई व्यवस्था के आगमन पर पुरानी राजसत्ताएं लुप्त हो गई थीं।

बांकीपुर उपचुनाव ने बिहार की राजनीति में संजीवनी काल का आगाज़ कर दिया है। यह जीत भाजपा के अहंकार के अंत और राजद की प्रासंगिकता पर लगे एक बड़े प्रश्नचिह्न के रूप में दर्ज की जाएगी। स्पष्ट है कि बिहार अब रामायण के अगले युद्ध-कांड के लिए तैयार है, जहां पुरानी सेनाओं को नई ऊर्जा और नई रणनीति का सामना करना होगा। बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे 3 अगस्त को सामने आ चुके हैं। इसमें जनसुराज प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने 19246 वोटों से जीत हासिल की है। उन्हें 63946 वोट मिले हैं। दूसरे नंबर पर भाजपा के नीरज सिन्हा को 44700 वोट मिले हैं, जबकि राजद के उम्मीदवार रेखा गुप्ता को 14241 वोट मिले हैं।

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