ड्रोन एवं सीसीटीवी कैमरे से चप्पे-चप्पे पर रखी जा रही है नजर
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। प्रथम सोमवारी पर सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित विश्वप्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ मंदिर भक्तों का जलाभिषेक के लिए तैयार है। श्रावण माह के प्रथम रविवार 2 अगस्त को हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा हरिहरनाथ का जलाभिषेक किया और मंदिर परिसर में अवस्थित मंदिरों में देवी – देवताओं की पूजा – अर्चना कर आशीर्वाद ग्रहण किया।
आध्यात्मिक एवं शिल्प कला का अद्भुत संगम है बाबा हरिहरनाथ का विग्रह
जानकारी के अनुसार हरिहरनाथ मंदिर गर्भगृह की बनावट और वहां स्थापित मूर्तियां आध्यात्मिक एवं शिल्प कला का अद्भुत संगम हैं। मान्यता है कि जब से यहां श्रीहरि (भगवान विष्णु) का वास है, तब से देवी लक्ष्मी और सरस्वती भी यहां स्थायी रूप से निवास करती हैं। शिवलिंग के ठीक पीछे एक ऊंचे चबूतरे पर प्रस्तर खंड (पत्थर) में भगवान विष्णु की चतुर्भुज मूर्ति उत्कीर्ण है। मूर्ति के दाएं और बाएं कसौटी पत्थर के दो स्तंभ हैं, जो संकेत देते हैं कि यह एक दिव्य द्वार का हिस्सा है, जिसके भीतर प्रभु निवास करते हैं।
भगवान विष्णु के आयुध: ऊपरी बायां हाथ सुदर्शन चक्र से सुशोभित है। निचला बायां हाथ: शंख धारण किए है। ऊपरी दायां हाथ में मूसल अथवा गदा है। निचला दायां हाथ स्वाहा (वरद) मुद्रा में खुला हुआ है। भगवान विष्णु के दाहिने हाथ की हथेली से सटकर मां लक्ष्मी विराजमान हैं। उनके बाएं हाथ में कमल का पुष्प है, जो विष्णुजी की हथेली के पिछले भाग को स्पर्श कर रहा है। शंख वाले निचले बाएं हाथ के समीप वीणाधारिणी मां सरस्वती की खड़ी प्रतिमा स्थापित है। बाद की कृतियों में श्रीहरि के मस्तक पर छाया बनकर विराजमान शेषनागजी की आकर्षक प्रतिकृति है। ठीक सामने शिव लिंग स्थापित है। इस तरह हरिहरनाथ गर्भगृह के पूर्वी द्वार के सामने ठीक बाबा हरिहरनाथ की प्रतिमा के समक्ष नंदी की प्रतिमा स्थापित की गई है।
मुख्य मंदिर के अतिरिक्त, परिसर के पीछे (पश्चिम दिशा में) पूर्वाभिमुख आठ लघु मंदिरों में स्थापित देवी-देवताओं की पूजा और आरती बाबा हरिहरनाथ के साथ ही संपन्न होती है, जिनमें मां दुर्गा, महालक्ष्मी, देवी सरस्वती, श्रीगजेंद्र मोक्ष (गज-ग्राह), श्रीगणेश मंदिर, श्रीश्री 108 शंकर, बजरंगबली, मां पार्वती शामिल हैं। इन सभी मंदिरों की व्यवस्था कुशल पुजारियों के अधीन है, जहां नित्य सुबह-शाम होने वाली अर्चना भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है।

श्रावण माह के प्रथम रविवार को बाबा हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य द्वार के उत्तर में स्थापित नवग्रह देवताओं के मंदिर में सर्वाधिक भीड़ देखी गयी है। मंदिर के मुख्य अर्चक आचार्य सुशील चंद्र शास्त्री, पवनजी शास्त्री, सदानंद बाबा और मंदिर के नंद बाबा एवं अन्य विद्वान पुजारियों के अनुसार, इन ग्रहों की शांति से जीवन के संकट दूर होते हैं।
यहां स्थापित नवग्रह देवताओं में ग्रहों के राजा सूर्य देव, शीतलता और मन के कारक चंद्र देव (सोम), भूमि पुत्र और लाल ग्रह, जो मेष व वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल (भौम), चंद्रमा और तारा के पुत्र, बुद्धि के देवता बुध, असुरों के देवगुरु और भौतिक सुख के प्रदाता शुक्र, सूर्य और छाया के पुत्र, न्याय के देवता शनि देव, छाया ग्रह, जो जातक के कर्मों के अनुसार फल देने वाले राहु एवं केतु शामिल हैं। धार्मिक मान्यता है कि जिस भक्त पर इन नौ ग्रहों की कृपा हो जाए, उसके जीवन में कोई भी आपदा या संकट टिक नहीं पाता।
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