भाव नृत्यों की अद्भुत प्रस्तुति पर झूम उठे दर्शक श्रोतागण
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला स्थित पर्यटन विभाग के मुख्य सांस्कृतिक पंडाल के मंच पर 10 नवंबर को दिवाकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत सुरभि कला मंच सोनपुर तथा साकार कलाकृति पटना के कलाकारों ने मेला दर्शकों को अपनी प्रस्तुति से मन मोह लिया।
इस दिवाकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम को देख दर्शक और श्रोतागण दिन भर संगीत के समुद्र में गोता लगाते रहे। साथ ही भक्ति गीतों व भाव नृत्यों की उम्दा प्रस्तुति पर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग सारण जिला के दिशा निर्देश पर सुरभि कला मंच के कलाकारों ने बिहार की सांस्कृतिक धरोहर सामा-चकेवा, पारंपरिक विवाह नृत्य, जट-जटिन, होली नृत्य की प्रस्तुति दी। इनके द्वारा दो कार्यक्रम प्रस्तुत किए गये। पहली प्रस्तुति सुरभि की रही जिसकी शुरुआत सुप्रसिद्ध कलाकार रागिनीश्री के भक्तिमय गीतों से की गयी।
जिसमें रागिनीश्री ने प्रथम पूज्य श्रीगणेश के प्रति समर्पित भक्ति गीत पहली पूजा तोहरे हो गौरी के ललना, हमारे भोले बाबा के अंखियां लाले लाल बा से शुभारंभ किया। जब – जब पियवा के गोरिया ध्यान धरेली गीतों कि प्रस्तुति पर दर्शक – श्रोता झूम उठे। उनकी सुरीली व् मधुर आवाज़ ने पूरे माहौल को गहरी आध्यात्मिकता और शांति से भर दिया। उनके गायन में भक्ति रस का ऐसा संचार था कि सभी ने मन ही मन भक्ति के अनमोल रस को महसूस किया।
इसके बाद मंच पर भाव नृत्यों कि बारी आई। अरविंद और नूतन की जोड़ी ने देवी गीत मन भावे मैया के चुनरिया गोटेदार सईया लेले आई हैं तथा कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया, कौन दिशा में? के साथ – साथ खेती – किसानी पर आधारित गीतों पर भी इस जोड़ी ने युगल नृत्य प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। मंच पर दूसरी प्रस्तुति जागृति और श्रुति ने अपनी सुरीली आवाज में भजनों की प्रस्तुति दी। जागृति कुमारी एवं श्रुति कुमारी के गायन आज मिथिला नगरिया निहाल सखिया, चारों दूल्हा में बड़का कमाल सखिया से किया गया। इसके बाद सीता रामजी की प्यारी, राजधानी लागे, राजधानी लागे, मोहे मिठो मिठो, सरयू जी रो पानी लागे तथा डिम डिम डमरू बजावेला हमार जोगिया भक्ति गीतों के गंवनई के समय श्रोताओं ने खूब तालियां बजाई। जिसने प्रमाणित किया कि भक्ति संगीत आज भी जन – जन के अंतर्मन को छूने की शक्ति रखता है।
इनके साथ तबला पर तुषार ने संगत किया। इस दौरान उद्घोषक बिट्ठलनाथ सूर्य ने अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरा। उनकी उद्घोषणा ने कार्यक्रम को पूरी तरह संगीतमय बना दिया। इसके अलावा नगरी हो अयोध्या सी, मेरे बांके बिहारी लाल, अच्युतम केशवम, छोटी सी मेरी पार्वती, श्याम चंदा है श्यामा चकोरी आदि भजनों ने भी दर्शकों को खूब झुमाया।
साकार कलाकृति पटना के कलाकारों ने मंच पर नृत्य की अपनी प्रस्तुति से उपस्थित जनों को सम्मोहित कर दिया। जो नृत्यों की प्रस्तुति हुई उसमें सोलह संस्कार पर आधारित नृत्य दर्शकों को सम्मोहित करते रहे। अंत में विदाई के दृश्य पर दर्शकों के आंखों से भी आंसू निकल गये। मंच के सामने बैठी कई बुजुर्ग महिलाएं अपने आंचल से आंख का कोना पोछने लगी। इस प्रस्तुति में राधा सिन्हा, संजना कुमारी, तनु कुमारी, प्राची, रिया कुमारी, विवेक कुमार, अजीत कुमार शामिल रहे। नृत्य का निर्देशन सवीर उर्फ रोज ने किया। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद जिला प्रशासन ने कलाकारों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले कलाकारों में श्रुति समेत अन्य शामिल रहे।
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