एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची के लालपुर में बीते 7 नवंबर से आयोजित तीन दिवसीय श्रीजलाराम सदा चरण कथा सत्संग के दूसरे दिन 8 नवंबर को अत्यंत भक्ति भाव और श्रद्धा देखा गया।
सरदार वल्लभभाई पटेल हॉल रांची में श्रीजलाराम सेवा समिति एवं महिला मंडल रांची द्वारा आयोजित कथा सत्संग के पावन अवसर पर लंदन से आये अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथाकार शास्त्री पियूषभाई मेहता ने पूज्य संत शिरोमणि जलाराम बापा के जीवन के प्रेरणादायी प्रसंगों का हृदयस्पर्शी वर्णन किया।
कथाकार शास्त्री पियूषभाई मेहता ने कथा में श्रीजालाराम बापा की रामभक्ति, अन्नदान परंपरा और मानव सेवा के महान आदर्शों पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि मात्र 20 वर्ष की आयु में पूज्य माता वीरबाई माँ के सहयोग और गुरुश्री भोजल राम बापा के आशीर्वाद से सदाव्रत की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य भूखे को भोजन और दीन-दुखियों की सेवा करना था।
कथाकार पियूषभाई मेहता ने अपने प्रवचन में बताया कि जलाराम बापा का जीवन त्याग, करुणा और सेवा का प्रतीक था। वे हर जीव में भगवान राम का दर्शन करते थे और बिना किसी भेदभाव के सबकी सेवा को सच्ची भक्ति मानते थे। कथा में बापा के जीवन से जुड़े अनेक अलौकिक चमत्कारों का भी उल्लेख किया गया, जिससे उपस्थित भक्तों में गहरा भाव उत्पन्न हुआ।

जानकारी देते हुए गुजराती समाज के हरीश दोषी उर्फ राजु भाई ने बताया कि यह कथा झारखंड की राजधानी रांची में पहली बार आयोजित की जा रही है। बताया कि कथा श्रवण में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बताया कि कथा स्थल पर सुंदर सजावट, अनुशासित व्यवस्था तथा कथा के पश्चात प्रसाद वितरण की आकर्षक व्यवस्था की गई थी। इसे लाइव प्रसारण यू ट्यूब चैनल और विष्णु पैथी युके पर भी देखा जा रहा था।
इस अवसर पर श्रीजलाराम सेवा समिति एवं महिला मंडल रांची द्वारा सभी भक्तों से अनुरोध किया गया कि वे सपरिवार पधारें, कथा श्रवण करें और पूज्य जलाराम बापा के जीवन संदेशों से प्रेरणा प्राप्त करें।कथा का रसपान समस्त गुजराती समाज ने लिया, जिसमें चंद्रकांत रायपट, पंकज ठक्कर, विनोद पटेल, रामजी भाई पटेल, छगन भाई पटेल, संतु भाई माणेक, राजू भाई दोषी, किरन पटेल, अरविंद भाई पटेल, किरण माणेक, हिना बेन कोटेचा, आनंद भाई माणेक आदि श्रद्धालूजन शामिल थे।
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