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दुनिया का सबसे बड़ा अजूबा बाजार हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला की एक झलक

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला दुनिया का सबसे बड़ा अजूबा मेला है। इस मेले को लेकर संत कबीर दास के दोहे जो ढूंढा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ, जो बौरा डूबन डरा रहा किनारे बैठ वाली कहावत चरितार्थ होती है।

हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला की खासियत यह है कि यहां देश और दुनिया के बाजारों में बिकनेवाली सभी वस्तुएं मिल जायेंगी। बस जरूरत है कि आप थके नहीं। परिश्रम करके तो देखिए, ढूंढिए, कहीं न कहीं आपको आपकी इच्छित सामग्री मिल जायेगी।

निश्चित ही ऐसा मेला अन्यत्र कहीं नहीं है। यह किसान संस्कृति का मेला है तो यह पशुधन संवर्द्धन संस्कृति का भी एशिया प्रसिद्ध मेला रहा है। कृषि बाजार इस मेला का मूलाधार है। बिहार भर के किसान यहां वैज्ञानिक कृषि का प्रशिक्षण लेने आते हैं। आंचलिक गीत – गवनई एवं नृत्य के माध्यम से कृषकों को कृषि विभाग के सांस्कृतिक मंच से प्रेरित किया जाता है। प्रदर्श के माध्यम से उन्नत खेती करने का तरीका बताया और दिखलाया जाता है।

अत्याधुनिक खेती के सभी औजार, मशीन, ट्रैक्टर, सिंचाई के पंप और मोटर, सभी तरह के बीज इस प्रांगण में उपलब्ध है। नर्सरी और पौधों से प्रेम रखने वालों के लिए यह उत्तम मेला है। कृषि के छात्रों के लिए यह कृषि मेला प्रांगण बहुउपयोगी है। वर्षों से इस प्रांगण में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग चल रही है।

थियेटरों के कलाकारों के दीवाने भी हैं मेला में पहुंचते

कृषि मेला के ठीक सामने सड़क के पूरब बिहार सरकार का ही मेला नखास प्रांगण है। थियेटर पुलिस चौकी के इस एरिया में थियेटरों का मेला लगता है। कोई ऐसा थियेटर नहीं है जिसमें सौ से कम महिला कलाकार हों। कह सकते हैं कि इन थियेटरों में बालाओं के नृत्य और संगीत की कमाई से उनके परिवार की परवरिश होती हैं। इसके अलावा सैकड़ों मजदूरों को रोजगार का अवसर प्रत्येक वर्ष मिलता है। इन थियेटरों का संचालन पूर्णतः सीसीटीवी की निगरानी में होती है। पूर्णतः मौज – मस्ती का दर्शन और उसका लुत्फ उठाते दर्शक टिकट कटाने में रुपए की परवाह नहीं करते। वैसे, शालीन दुनिया अभी भी इन थियेटरों से दूरी बनाकर रखते हैं और मेला में घूम रही महिलाएं तो थियेटरों की ओर एक नजर देख झट से आगे बढ़ जाती हैं।

जो भी हो वर्तमान दौर में मेला को जमाए रखने का एक आधार यहां संचालित थियेटर भी है। यानी इस तरह की पसंदगी वाले थियेटरों को खोज लेते हैं। इनमें काम करने वाले थियेटर बालाओं की अपनी – अपनी राम कहानी होती है। कोई पढ़ाई करती है, तो कोई बूढ़े माता -पिता की बीमारी की वजह से इस धंधे में संलिप्त है।

परिवार के साथ देखना है तो आइए पर्यटन विभाग के सांस्कृतिक पंडाल

हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला का मुख्य सांस्कृतिक पंडाल और मंच। पर्यटन विभाग द्वारा संचालित इस मंच की अपनी गौरव गाथा है। कभी आकाशवाणी पटना का चौपाल का सीधा प्रसारण इस मंच से होता था। मुखियाजी, बटुक भाई और गीता बहन की आवाज सुनने के लिए किसानों का भारी जमावड़ा इस पंडाल में हुआ करता था। राज्य स्तरीय पुलिस पुरस्कार प्रदर्शनी के आयोजन भी मेले के इसी पंडाल के मंच पर होता था। अंतर सिर्फ यही है कि उस समय राजस्व विभाग एवं सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के हाथों से यह पंडाल और मंच संचालित होता था। नीतीश कुमार जब मुख्यमंत्री बने तो राज्य स्तरीय पुलिस पुरस्कार बन्द कर दिए गए। चौपाल के प्रसारण बंद करा दिया गया। बावजूद इसके वर्तमान में यह पंडाल सुसंस्कृत सैलानियों के मनोरंजन के लिए बेहतरीन विकल्प है। परिवार के साथ, बच्चों के संग या माता – पिता के साथ बैठ कर कला के विविध क्षेत्रों में पारंगत कलाकारों का कार्यक्रम देखकर फुल मस्ती आनंद उठा सकते हैं। मनोरंजन का मनोरंजन और साथ में फ्री में ज्ञानवर्धन।

अध्यात्मवादियों को भी मिलेगा मेला में भरपूर शुकून

इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा स्नान से पूर्व मेला उद्घाटन नहीं होने से दुखी भक्तों को मेला के विभिन्न निजी प्रांगणों में धर्म- अध्यात्म की भूख भी मिटेगी। श्रीराम जन्भूमि मंदिर, माता वैष्णव मंदिर, चार धाम यात्रा का मेला में ही दर्शन की व्यवस्था हो चुकी है। खूब तैयारी कर लीजिए शीघ्र ही इनका पट खुलेगा। टिकट खिड़की पर टिकट कटेगा। परिवार संग इससे बढ़िया सस्ता और सुविधाजनक तीर्थ यात्रा सोनपुर मेले में ही सुलभ कराया गया है। इस तरह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि जो दर्शक व् सैलानी प्रयास और परिश्रम करते हैं, वे कुछ न कुछ इस मेले से हासिल किए बिना नहीं लौटते।

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