अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला में राजस्थानी एवं अजमेरी बकरियों का मेला लगा है। मेला के बकरी बाजार में गरीबों की गाय मानी जानेवाली बकरियों की इस वर्ष भी जमकर बिक्री हो रही है।
जानकारी के अनुसार मेला में राजस्थान के अलवर जिले के बकरी व्यवसायियों की छोटे – छोटे यहां 30 बकरी बिक्री सेंटर संचालित हैं। मेला में इस बार इन सेंटरों पर चीतल, वितल, यमुनापारी नस्ल की दुधारू बकरियों की आमद हुई है, जो राजस्थान और पश्चिमी उत्तरी भारत में पाई जाती हैं। बकरी की एक नस्ल पश्मीना भी है जो कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में पाई जाती है, जिसे अभी तक इस मेले में नहीं लाई गई है।
बकरी व्यापारियों ने 19 नवंबर को एम भेंट में बताया कि अगले वर्ष पशमीना नस्ल की बकरियां भी मेले में उपलब्ध होंगी। ऐसा बकरी लाने पर व्यवसायी विचार कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि हरिहर क्षेत्र मेला में बकरियों के अधिकांश व्यापारी राजस्थान के अलवर जिले के हैं, जो देश के प्रायः सभी बड़े मेलों में बकरियों का व्यापार करने के लिए जाते हैं। पंजाब और हरियाणा से उन्नत नस्ल की गायों के इस मेले में नहीं आने से पिछले कई वर्षों से गाय बाजार के एक बड़े क्षेत्र में उदासी छाई रहती थी। उसमें इस बार राजस्थानी बकरियों ने रौनक ला दी है।
मेला में गाय बाजार के विभिन्न हिस्सों के मालिक यह खुले मन से स्वीकार करते हैं कि उन्नत नस्ल की इन दुधारू बकरियों से मेले के पशु बाजार का रंग अनोखा हो गया है। बकरियों में सबसे ज्यादा खरीद -बिक्री जमुना पारी नस्ल की हो रही है। ये बकरियां अपने लंबे -लंबे कान और चितकबरे रंग के कारण खरीददारों की पहली पसंद बन रही हैं।
बच्चों और बूढों के लिए है दूध रामबाण औषधि
चिकित्सक भी मानते हैं कि बकरी का दूध बच्चों को हीं नहीं, बल्कि बूढों के लिए भी फायदेमंद है। ग्रामीण पशुपालक तो इसे डेंगू पीड़ितों के लिए जीवन का वरदान तक मानते है।
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