एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। विस्थापितों को आर आर पॉलिसी के तहत नौकरी, पुनर्वास और मुआवजा दी जायगी। विस्थापित भी सीसीएल के अंग हैं। विस्थापितों के साथ अन्याय नहीं होगा। माइंस विस्तार में जमीन मामले के निराकरण को लेकर कंपनी (Company) गंभीर है। इस दिशा में तेज गति से काम हो रहा है।
उक्त बातें 22 अगस्त को बोकारो जिला (Bokaro District) के हद में करगली आफिसर्स क्लब मे बीएंडके क्षेत्र के महाप्रबंधक एम कोटेश्वर राव (General Manager M Koteswara Rao) ने कारो और बरवाबेडा बस्ती के ग्रामीणो के साथ संयुक्त बैठक के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि हर घर के एक परिवार को लगभग 8-9 से लाख रुपए मकान छोड़ने के एवज मे मिलेगे। जीएम राव ने कहा कि रैयतो का अहम योगदान है। रैयतो द्वारा जमीन दिए जाने पर कोलियरी का विस्तारीकरण संभव है।
उन्होंने कहा कि सीसीएल जिस जमीन पर कोयला उत्पादन कर रही है। अगर वह विस्थापित की है तो जमीन का सत्यापन करा कर दे। जिला परिषद सदस्य सह श्रमिक नेता ओमप्रकाश सिंह उर्फ टीनू सिंह ने कहा कि विस्थापितों के प्रति प्रबंधन गंभीर नहीं है।
प्रबंधन विस्थापित प्रभावितों को नियोजन, पुनर्वास और मुआवजा देने में टालमटोल कर रहा है। जिससे उनका हक मारा जा रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विस्थापित आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। रोजगार के लिए दूसरे राज्य जाने को मजबूर हो रहे हैं। कुशल, अकुशल व शिक्षित नौजवान काम की तलाश में भटक रहे हैं।
विस्थापितों की जमीन पर कोयला खनन कराकर सीसीएल प्रबंधन करोड़ों का मुनाफा अर्जित कर रही है। जबकि विस्थापितों को वाजिब अधिकार देने के बजाय प्रबंधन सिर्फ आश्वासन देता रहता है।
मौके पर एसओ (एलएडआर) बीके ठाकुर, पीओ राजीव कुमार सिंह, एसओ पीएडपी एसके झा, जमसं नेता संतोष कुमार, विस्थापितों की ओर से प्रताप सिंह, संजय गंजू, मेघनाथ सिंह, जीबू विश्वकर्मा, प्रमोद सिंह, दीनानाथ सहित दर्जनों बरवाबेडा और कारो के विस्थापित उपस्थित थे।
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