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महादेव बेड़ा में पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर लिया गया जंगल बचाने का संकल्प

वन संरक्षण तथा वनों की सुरक्षा में ग्रामीणों की भूमिका अहम-डीएफओ

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के हिसीम पहाड़ स्थित महादेवबेड़ा में 2 सितंबर को जंगल एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्रीय वन पर्यावरण सुरक्षा सह प्रबंधन समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों ने पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर जंगलों की रक्षा का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और जंगल को हर हाल में सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम में बोकारो के वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) नीतीश कुमार एवं सहायक वन संरक्षक राकेश कुमार सिंह मुख्य रूप से शामिल हुए। वन सुरक्षा समिति के सदस्यों एवं ग्रामीणों ने पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधते हुए कहा कि जंगल उनके जीवन, जीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता देवशरण हेंब्रम ने की, जबकि संचालन केंद्रीय अध्यक्ष विष्णुचरण महतो ने किया।

इस अवसर पर डीएफओ नीतीश कुमार ने कहा कि जंगल केवल वन विभाग की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे समाज की धरोहर हैं। जंगलों की सुरक्षा में ग्रामीणों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि ग्रामीण ही जंगल के सबसे करीब रहते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तत्परता और मजबूती के साथ ग्रामीण पहले जंगलों की रक्षा करते थे, उसी भावना के साथ उन्हें आगे भी सक्रिय रहना चाहिए। कहा कि वन विभाग वन सुरक्षा समितियों के साथ मिलकर काम करेगा और संरक्षण के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

डीएफओ ने पुटूस को जंगल के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसकी छंटाई वन सुरक्षा समितियों के माध्यम से कराने की योजना तैयार कर सरकार को प्रस्ताव भेजने की बात कही। उन्होंने लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी वन सुरक्षा समितियों के पुनर्गठन का भी भरोसा दिलाया।

सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) राकेश कुमार सिंह ने कहा कि जंगलों की सुरक्षा केवल वन विभाग के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। ग्रामीणों को जंगल की सुरक्षा के लिए लगातार सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने ग्रामीणों से जंगलों को आग से बचाने, अवैध कटाई पर रोक लगाने तथा वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों की जानकारी विभाग को देने की अपील की। उन्होंने कहा कि वन विभाग और ग्रामीण समितियों के बीच बेहतर समन्वय से जंगलों का संरक्षण और अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।

केंद्रीय अध्यक्ष विष्णुचरण महतो ने कहा कि ग्रामीण वन सुरक्षा समितियां वर्षों से जंगलों की रक्षा करती रही है। ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर जंगलों को आग और अवैध कटाई से बचाने का काम किया है। इसलिए जंगल की सुरक्षा करने वाले ग्रामीणों को उनके अधिकार और वनोपज का उचित लाभ मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वन सुरक्षा समितियों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन देकर मजबूत किया जाना चाहिए। विभाग और समितियों के बीच बेहतर तालमेल से ही जंगल संरक्षण का अभियान सफल होगा। उन्होंने सरकार के संकल्प के अनुरूप वनोपज का 90 प्रतिशत हिस्सा वन सुरक्षा समितियों को देने, निष्क्रिय समितियों का पुनर्गठन करने तथा समिति सदस्यों पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमों को वापस लेने की मांग की।
कसमार प्रखंड प्रमुख नियोती कुमारी ने कहा कि जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन, संस्कृति, परंपरा और आजीविका का अभिन्न हिस्सा है।

कहा कि जंगलों की रक्षा के लिए ग्रामीण जिस तरह वर्षों से अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे हैं, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और संकल्प का प्रतीक है। कहा कि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो पर्यावरण संतुलित रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने ग्रामीणों से जंगलों की सुरक्षा के लिए एकजुट रहने तथा आगजनी, अवैध कटाई एवं जंगल को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने की अपील की।

प्रमुख ने कहा कि वन सुरक्षा समितियों को सक्रिय और सशक्त बनाने की जरूरत है। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर जंगल संरक्षण के कार्य को और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीणों की जायज मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष दिलीप कुमार हेंब्रम ने कहा कि जंगल और ग्रामीण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। जंगल सुरक्षित रहेगा तो ग्रामीणों की आजीविका और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने वन सुरक्षा समितियों को मजबूत करने और ग्रामीणों को संरक्षण कार्य में सक्रिय भागीदारी देने पर जोर दिया। उन्होंने जंगली हाथियों से ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की।

पंचायत समिति सदस्य (पंसस) जगेश्वर मुर्मू ने कहा कि वन सुरक्षा समितियों के सदस्य लंबे समय से जंगल की रक्षा में योगदान देते रहे हैं। उन्हें विभाग की ओर से आवश्यक सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को साथ लेकर चलने से जंगल संरक्षण का अभियान और मजबूत होगा। मुखिया पति फणींद्र मुंडा ने कहा कि जंगलों को बचाना किसी एक या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। यह पूरे समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीणों से जंगलों को आग और अवैध कटाई से बचाने के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की। केंद्रीय उपाध्यक्ष गंगाधर महतो ने कहा कि वन सुरक्षा समितियों को सक्रिय एवं मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है।

समितियों को अधिकार और संसाधन मिलने से ग्रामीण और अधिक प्रभावी ढंग से जंगलों की रक्षा कर सकेंगे। कोषाध्यक्ष आनंद कुमार महतो ने कहा कि जंगलों से ग्रामीणों की आजीविका भी जुड़ी हुई है। इसलिए वनोपज पर ग्रामीणों के अधिकार को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने विभाग और ग्रामीण समितियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बतायी। समिति के संरक्षक वतन महतो ने कहा कि जंगलों की सुरक्षा के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ-साथ समितियों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने वन संरक्षण को जनअभियान बनाने पर जोर दिया। दिलीप कुमार महतो ने कहा कि पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधना केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति और जंगलों की रक्षा का संकल्प है।

इस संकल्प को केवल एक दिन तक सीमित न रखकर पूरे वर्ष व्यवहार में उतारने की जरूरत है। महेंद्र नाथ महतो ने कहा कि जंगलों को सुरक्षित रखने के लिए ग्रामीणों की एकजुटता जरूरी है। उन्होंने अवैध कटाई एवं जंगल में आग लगाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने की अपील की। हरिबोल महतो ने कहा कि वन सुरक्षा समितियों को पुराने स्वरूप में सक्रिय कर ग्रामीणों को जंगल संरक्षण की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। इससे जंगलों की सुरक्षा और मजबूत होगी।.भुवनेश्वर महतो ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जंगल बचाना बेहद जरूरी है। पेड़-पौधों की रक्षा के साथ-साथ ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने की जरूरत है।

पहाड़ी रास्ते में यात्री शेड और सामुदायिक भवन की मांग
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों की ओर से कई मांगें भी रखी गयीं। खुदीबेड़ा से हिसीम बस्ती तक करीब छह-सात किलोमीटर लंबे पहाड़ी रास्ते में यात्रियों की सुविधा के लिए यात्री शेड बनाने की मांग की गयी। इसके अलावा ग्रामीणों के सामाजिक एवं सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए सामुदायिक भवन का निर्माण कराने की मांग भी उठायी गयी।

ग्रामीणों ने जंगली हाथियों से सुरक्षा के लिए वन सुरक्षा समितियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही समिति सदस्यों पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमों को वापस लेने और लंबे समय से निष्क्रिय समितियों का पुनर्गठन करने की मांग भी रखी। कार्यक्रम में आकाशवाणी के लोक कलाकार प्रेमचंद कालिंदी एवं सुनील कुमार महतो ने वन संरक्षण से जुड़े गीत प्रस्तुत किए। गीतों के माध्यम से ग्रामीणों को पेड़-पौधों की रक्षा, जंगलों को आग से बचाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। इस दौरान समिति के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष जगदीश महतो को श्रद्धांजलि भी दी गयी। उपस्थित जनसमूह ने उनके योगदान को याद करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।

मौके पर पंसस विनोद कुमार महतो, करण ओहदार, रामबिलास महतो, सुनील महतो, झरीराम महतो, सरोज महतो, नितेश करमाली, सुरेश टुडू, देवलाल महतो, ललन महतो, राजेश महतो, चंद्रकिशोर महतो, राजेश मुर्मू, गीता देवी, सुमन देवी, मीना देवी, प्रतिभा देवी, दशमी देवी, नीमा देवी, शीतला देवी और कल्पना देवी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण रहिवासी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित ग्रामीणों ने पेड़ों पर बांधे गए रक्षा सूत्र को जंगल और प्रकृति की सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक बताते हुए कहा कि जंगलों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास लगातार जारी रहेगा।

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