रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के खैराचतार गांव से एक ऐसे परिवार की दर्दनाक कहानी सामने आई है, जहां करीब 12-13 वर्षीय बच्चा जन्म से ही पिता के स्नेह और संरक्षण से वंचित है। पीड़ित बच्चा अपनी विकलांग मां और वृद्ध नानी के सहारे जीवन गुजार रहा है।
परिवार का आरोप है कि कुछ पड़ोसियों द्वारा बेवजह अफवाह फैलाकर नानी और नाती को परेशान किया जाता है तथा आए दिन अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। बताया जाता है कि बच्चे की मां के साथ वर्षों पूर्व दुष्कर्म की घटना हुई थी। मामले में आरोपी कुछ समय जेल में रहने के बाद कथित रूप से बाहर आ गया और बाद में दूसरी शादी कर ली। पीड़ित परिवार का कहना है कि मामले में बच्चे की मां को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।
पीड़िता मां स्वयं विकलांग है और उसने दुसरो के घरों में काम कर किसी तरह अपने बेटे का पालन-पोषण किया। बाद में खैराचतार गांव के एक शादीशुदा ने उससे शादी की, लेकिन वह कथित रूप से शराब का आदी निकला। इसके बाद उसने महिला और उसके बच्चे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कुछ समय तक बच्चा अपनी मां के साथ रहा। आर्थिक तंगी के कारण कम उम्र में ही उसे काम करने की स्थिति का सामना करना पड़ा और उसकी कमाई का इस्तेमाल परिवार के भरण-पोषण में होता रहा।
बताया जाता है कि बाद में वह बच्चा किसी तरह अपनी नानी के घर पहुंचा। वृद्ध नानी ही वर्तमान में उसका सहारा बनी हुई हैं। परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद कुछ पड़ोसियों द्वारा लगातार विवाद और अफवाहों के जरिए उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। परिवार के अनुसार स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को एक पड़ोसी ने वृद्ध नानी के साथ कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। नानी ने मदद की उम्मीद में स्थानीय स्तर पर शिकायत भी की, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिल सकी। परिवार का आरोप है कि प्रभावशाली जनों के संरक्षण के कारण आरोपी बेखौफ है।
बच्चे की नानी का कहना है कि वह वृद्ध हैं और उनके पास कोई मजबूत सहारा नहीं है। उन्होंने बच्चे की पढ़ाई और भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारी के समक्ष आवेदन देने के बाद बच्चे को स्कूल में दाखिला दिलाने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक उसका नामांकन नहीं हो सका है।
परिवार ने बोकारो जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से बच्चे की शिक्षा सुनिश्चित कराने, परिवार को सुरक्षा देने, पड़ोसियों द्वारा कथित प्रताड़ना की जांच कराने तथा पुराने मामले में पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की है।
इस बावत स्थानीय रहिवासियों का कहना है कि बच्चे का भविष्य किसी भी विवाद या पारिवारिक परिस्थितियों की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। प्रशासन को मामले की निष्पक्ष जांच कर बच्चे की पढ़ाई, सुरक्षा और संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
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