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डीएवी पुन्दाग में की गई वैदिक हवन कर जनकल्याण की कामना

हवन के साथ मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ध्वनि तरंगित होती है-डॉ तापस घोष

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। झारखंड की राजधानी रांची के डीएवी पब्लिक स्कूल पुन्दाग में स्कूल के प्राचार्य की अध्यक्षता में 27 जून को स्कूल के सभी शिक्षकों द्वारा वैदिक हवन कर जनकल्याण की कामना की गई। वरीय संगीत शिक्षक शैलेन्द्र कुमार पाठक द्वारा हवन कर महापुरुषों की जयकारा लगाकर बच्चों के उज्जवल की कामना की गयी।

हवन से होने वाले लाभ के संदर्भ में जानकारी देते हुए प्राचार्य डॉ तापस घोष ने बताया कि वर्तमान समय ने हवन, वायुमंडल शुद्धि के साथ -साथ बच्चों के मानसिक विकास व् आचरण में पवित्रता के लिए किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हवन से जो धुआं निकलता है उससे वायुमंडल शुद्ध होता है। कहा कि यह माना जाता है कि हवन में 94 प्रतिशत हानिकारक जीवाणु नष्ट करने की क्षमता होती है। आम की लकड़ी फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नामक गैस उत्पन्न करती है, जो खतरनाक विषाणु और जीवाणुओं को मारती है तथा वातावरण को शुद्ध करती है। उन्होंने कहा कि हवन के साथ किसी मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ध्वनि तरंगित होती है। साथ ही शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।

वरीय संगीत शिक्षक पाठक ने बताया कि अगर आधे घंटे हवन में बैठा जाए और हवन के धुएं का शरीर से सम्पर्क हो तो टाइफाइड जैसे जानलेवा रोग फैलाने वाले जीवाणु खत्म हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हवन कुंड में सभी देवी- देवताओं के नाम की आहुति दें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कम से कम 108 बार आहुति देनी चाहिए। कहा कि यज्ञ प्राचीन भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। इससे वातावरण शुद्ध होने के साथ मन के विचार भी प्रभावित होते हैं। कहा कि हवन के माध्यम से ही मानव देवताओं को प्रसन्न करते हैं और मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। कहा कि शास्त्रों में पांच प्रकार के यज्ञ का वर्णन मिलता है। एक ब्रह्म यज्ञ जिसमें ईश्वर या इष्ट देवताओं की उपासना की जाती है। दूसरा देव यज्ञ जिसमें देव पूजा और अग्निहोत्र कर्म किया जाता है।

मौके पर उपस्थित शिक्षकों ने बताया कि डीएवी संस्था द्वारा अध्ययनरत विद्यार्थियों को गुणात्मक तथा रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करना ही प्राथमिकता रही है। देश के युवाओं को परिश्रम के साथ ही जीवन के हर मुकाम पर सफलता पाते हुए अपने अभिभावकों एवं संस्था को गौरवान्वित करनी चाहिए। मेहनत से ही वांछित परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।विद्यार्थियों को अच्छा इंसान बनकर देश व समाज के प्रति कर्तव्य का निर्वाह करनी चाहिए। ज्ञात हो कि हवन में विद्यालय के लगभग 70 से अधिक शिक्षक-शिक्षिका एवं शिक्षकेत्तर कर्मी उपस्थित थे।

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