धर्म और शास्त्र के बिना मानव जीवन पशु समान-स्वामी लक्ष्मणाचार्य
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम् में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन 19 मई को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज ने दिव्य वाणी से भागवत महापुराण के गूढ़ रहस्यों को उजागर करते हुए मानव जीवन का वास्तविक सार समझाया।
स्वामीजी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि मनुष्य के जीवन से शास्त्र और धर्म को निकाल दिया जाए, तो मानव और पशु में कोई अंतर नहीं रह जाएगा। कहा कि शास्त्र ही हमें सही मार्ग दिखाते हैं और धर्म का ज्ञान कराकर मनुष्य को पशुवत आचरण करने से रोकते हैं।
कथा के दौरान स्वामीजी ने बुढ़ापे और जीवन की क्षणभंगुरता का अत्यंत भावुक करने वाला चित्रण किया। उन्होंने कहा कि
वृद्धावस्था में जब शरीर शिथिल हो जाता है, बाल सफेद हो जाते हैं और मुंह के दांत टूट जाते हैं, तब भी इंसान उम्मीदें नहीं छोड़ता। कड़वा सच तो यह है कि इंसान जब तक कमाने योग्य रहता है, परिवार तभी तक उससे प्रेम करता है। जैसे पानी सूखने पर तालाब का अस्तित्व खत्म हो जाता है, वैसे ही धन नष्ट होने पर परिवार भी साथ छोड़ देता है।
स्वामीजी ने श्रद्धालुओं का आह्वान करते हुए कहा कि संसार के इस मोह-जाल से निकलकर जीवात्मा को हमेशा गोविंद की शरण में रहना चाहिए और निष्काम कर्म करते हुए ईश्वर के आश्रित होना चाहिए। भाई-भाई के रिश्ते पर गंभीर संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि पाप की कमाई परिवार को ले डूबती है। ध्रुव चरित्र और जड़भरत के पावन प्रसंग की व्याख्या करते हुए स्वामीजी ने समाज में टूटते रिश्तों पर कड़ा प्रहार किया।
उन्होंने कहा कि संसार में सब कुछ दोबारा मिल सकता है, लेकिन सगा भाई नहीं मिलता। जो धोखे से भाई की संपत्ति हड़पते हैं, उन्हें न केवल खुद नारकीय कष्ट भोगने पड़ते हैं, बल्कि उनके पाप का फल उनके बच्चों को भी भुगतना पड़ता है। कहा कि पाप की कमाई कभी फलती-फूलती नहीं, वह पाप के रास्तों में ही बर्बाद हो जाती है।
नृसिंह अवतार की दिव्य झांकी ने बांधा समां
कथा के दौरान जब भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान नृसिंह के अवतार का प्रसंग आया, तो पंडाल जय श्रीहरि के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर भगवान नृसिंह और भक्त प्रह्लाद की अत्यंत मनमोहक जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई। स्वामीजी ने क्षेत्रीय भाषा के प्रभाव के साथ कहा कि प्रहलदुआ के कारण भइया रधवा भइले बधवा। उन्होंने बताया कि अपने अनन्य भक्त प्रह्लाद की पुकार पर ही भगवान को खंभे से प्रकट होना पड़ा और तेरह महीने तक गर्भ का कष्ट सहना पड़ा।
इस आध्यात्मिक उत्सव में मुख्य रूप से भोला सिंह, सुदर्शन राय, दिलीप झा, रतन कुमार कर्ण, गायत्री शुक्ला, नीला देवी, मीरा देवी, रंजित राय, श्रीलाल पाठक, शंभु झा और फुल झा सहित सोनपुर, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा एवं आस-पास के क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। आरती और महाप्रसाद वितरण के साथ तीसरे दिन की कथा को विश्राम दिया गया।
कथा समिति ने जानकारी दी कि 20 मई को पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बेहद भव्य और धूमधाम से मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर विशेष झांकियां और माखन-मिश्री का भोग लगाया जाएगा। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस दिव्य आनंद और पुण्य के भागीदार बनें।
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