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सीसीएल में कंप्यूटर जागरूकता कार्यक्रम के प्रतिभागियों को मिला प्रमाण पत्र

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। देश की महारत्न कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड की अनुशंगी सेंट्रल कोलफील्डस लिमिटेड (सीसीएल) के मानव संसाधन विकास विभाग के एमटीसी में नवनियुक्त सामान्य सहायक (ट्रेनी) कर्मियों के लिए आयोजित पांच दिवसीय कंप्यूटर जागरूकता कार्यक्रम का समापन 24 अप्रैल को किया गया।

इस अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम में भाग लेनेवाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। समापन कार्यक्रम में मुख्य रूप से सीसीएल मुख्यालय रांची के महाप्रबंधक मानव संसाधन विभाग एम. एफ. हक, महाप्रबंधक एनईई कविता गुप्ता, महाप्रबंधक (प्रणाली) विभा उरांव तथा सीसी एंड पीआर विभाग के विभागाध्यक्ष आलोक कुमार उपस्थित रहे। सभी ने प्रतिभागियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी।

सीसीएल मुख्यालय रांची के जनसंपर्क विभाग के अनुसार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बीते 20 अप्रैल से 24 अप्रैल तक आयोजित किया गया था। उद्घाटन सत्र में एम. एफ. हक एवं कविता गुप्ता ने प्रतिभागियों को एक संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण अनुभव के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की शुरुआत कविता गुप्ता द्वारा नाउ योर कंपनी विषय पर सत्र से की गयी।

पांच दिनों के दौरान प्रतिभागियों को कंप्यूटर प्रणाली के मूल सिद्धांत, एमएस ऑफिस एवं उसके व्यावहारिक उपयोग, लाइब्रेरी ऑफिस, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, सहयोगी उपकरण, एआई एवं उभरती तकनीकों, इंट्रानेट एवं नेटवर्क की मूल बातें, एलएएन तथा लेखन अभ्यास सत्रों से अवगत कराया गया। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ सिस्टम विभाग के अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में डेस्कटॉप पर व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। कार्यक्रम में कुल 21 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान एवं कौशल से उनकी कार्यकुशलता में वृद्धि होने के साथ-साथ संगठन में उनके करियर विकास को भी बल मिलने की उम्मीद है।

ज्ञात हो कि सीसीएल द्वारा समय-समय पर अपने कर्मियों के कौशल विकास को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण एवं विकासात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन पहलों के माध्यम से कर्मचारियों की कार्यकुशलता, तकनीकी दक्षता तथा पेशेवर क्षमता में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जाती है। ऐसे कार्यक्रम न केवल उन्हें नवीन तकनीकों एवं आधुनिक कार्यप्रणालियों से अवगत कराते हैं, बल्कि उनकी उत्पादकता और आत्मविश्वास को भी बढ़ाते हैं। जिससे संगठन की समग्र प्रगति को नई दिशा मिलती है।

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