प्रिंसेस बाय बर्थ, हिस्ट्री मेकर बाय चॉइस की लेखिका गीतांजलि झा से खास बातचीत
एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। कोल इंडिया लिमिटेड की अनुशंगी सेन्ट्रल कोलफीड्स लिमिटेड (सीसीएल) के सेवानिवृत खनन अधिकारी कुंवर कांत झा की पुत्री गीतांजलि झा द्वारा लिखित पुस्तक प्रिंसेस बाय बर्थ, हिस्ट्री मेकर बाय चॉइस ने पुरे देश में नारी शक्ति तथा नारियों के अंदर छिपी अदम्य शक्ति को लेकर पुरे देश में एक नई बहस छेड़ दी है। बतौर गीतांजलि उन्हें वर्ष 2020 में देश में कोरोना संकट के दौरान लॉकडाउन में भय, अकेलापन व् दु:ख का माहौल ने लिखने को प्रेरित किया।
प्रिंसेस बाय बर्थ, हिस्ट्री मेकर बाय चॉइस की लेखिका गीतांजलि के अनुसार इस पुस्तक को लिखने की प्रेरणा उन्हें कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, देशभर के कई परिवारों की तरह हम भी दूरदर्शन पर महाभारत देखने लगे थे। कहा कि मुझे याद है कि मैं हर दिन दोपहर 12 बजे का इंतज़ार करती थी। उस समय चारों ओर भय, अकेलापन और दु:ख का माहौल था, लेकिन इस महाकाव्य ने मुझे आशा और शक्ति दी। तभी मुझे लगा कि महाभारत की सबसे सशक्त महिलाओं की दृष्टि से इस कथा को दोबारा बताया जाना चाहिए, ताकि पाठकों को प्रेरणा और साहस मिल सके।
कहा गया कि अगर आपको इस पुस्तक को तीन शब्दों में बताना हो तो वे क्या होंगे? कहा गया कि सशक्त, प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक। कहा गया कि इस पुस्तक में ऐसा क्या है जो पीछे के कवर पर नहीं मिलेगा? कहा गया कि इस पुस्तक का एक सुंदर पक्ष माता कुंती और द्रौपदी के बीच का स्नेहपूर्ण और सम्मानजनक रिश्ता है। यह सास-बहू के संबंधों का एक सकारात्मक और प्रेरक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
इसके अलावा श्रीकृष्ण और उनकी सखी याज्ञसेनी (द्रौपदी) की अनोखी मित्रता भी इस पुस्तक का विशेष आकर्षण है, जो सच्ची दोस्ती का सुंदर उदाहरण है। क्या आपके वास्तविक जीवन के अनुभवों का प्रभाव इन पात्रों पर पड़ा है? के संबंध में पुस्तक की लेखिका गीतांजलि ने कहा कि यह महर्षि वेदव्यास की मूल कथा का विनम्र पुनर्कथन है, इसलिए घटनाएँ वही हैं। लेकिन कुंती, गांधारी, द्रौपदी और उत्तरा की भावनाएँ आज भी हमारे आसपास दिखाई देती हैं। कहा कि अपनी माँ में मुझे कुंती का त्याग दिखाई देता है। कामकाजी महिलाओं में गांधारी की मौन सीमाएँ दिखती है और परिस्थितियों से लड़ती एकल माताओं में कुंती और उत्तरा की झलक मिलती है। कहा कि द्वापर युग की यह कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
लिखते समय सबसे कठिन दृश्य कौन-सा था के संबंध में गीतांजलि ने कहा कि द्रौपदी चीरहरण का प्रसंग लिखना सबसे कठिन था। इसे लिखते समय मुझे आज के समाज की अनेक दर्दनाक घटनाएँ याद आ गईं। यह केवल पौराणिक कथा नहीं लगी, बल्कि हमारे वर्तमान का दर्पण दर्शाता है।
आप पुस्तक के किस पात्र से सबसे अधिक जुड़ाव महसूस करती हैं के संबंध में उन्होंने कहा कि मैं द्रौपदी से सबसे अधिक जुड़ाव महसूस करती हूँ।

वह निडर हैं और सच्चाई बोलने से कभी नहीं डरती। उनके साहस, गरिमा और कृष्ण के प्रति उनके प्रेम ने मुझे हमेशा प्रभावित किया है। पाठकों के लिए इस पुस्तक का मुख्य संदेश क्या है को लेकर उन्होंने कहा कि वे चाहती है कि पाठक यह समझें कि वे अपनी जीवन-कथा के स्वयं लेखक हैं। परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, हमारे पास हमेशा अपनी प्रतिक्रिया चुनने की स्वतंत्रता होती है। पुस्तक को लिखते समय कौन-सा पात्र आपको सबसे अधिक आश्चर्यचकित कर गया के बावत उन्होंने बताया कि पुस्तक में उत्तरा का चरित्र मुझे सबसे अधिक प्रभावित कर गया। कहा कि केवल सोलह वर्ष की आयु में अपने पति अभिमन्यु को खोने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और एक साहसी माँ के रूप में परीक्षित का पालन-पोषण किया।
अगर इस पुस्तक पर फिल्म बने तो आपकी ड्रीम कास्ट क्या होगी को लेकर गीतांजलि ने कहा कि द्रौपदी के रूप में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, कुंती के रूप में प्रियंका चोपड़ा, गांधारी के रूप में माधुरी दीक्षित और उत्तरा के रूप में आलिया भट्ट का किरदार बेहद उत्तम होगा। कहा कि कृष्ण के रूप में वे नितीश भारद्वाज को फिर से देखना पसंद करेंगी।
पुस्तक के प्रकाशन या लोकार्पण के दौरान बड़ी चुनौती के बावत उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती ऐसे प्रकाशक को ढूँढना था जो पुस्तक की भावनात्मक गहराई को समझे और इसे महिला दिवस पर प्रकाशित करने की उनकी इच्छा को साझा करे। सौभाग्य से सोच इंडिया पब्लिकेशन हाउस ने उनके सपने को साकार किया तथा बीते 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर इस पुस्तक का लोकार्पण संभव हो सका है।
उनकी अगली योजना को लेकर पुछे गये सवाल पर गीतांजलि ने कहा कि फिलहाल मैं कुछ ब्लॉग लिख रही हूँ और बच्चों के लिए प्रेरणादायक सोने से पहले सुनाई जाने वाली कहानियों पर काम कर रही हूँ। पाठक को पुस्तक की उपलब्धता के बावत उन्होंने कहा कि प्रिंसेस बाय बर्थ, हिस्ट्री मेकर बाय चॉइस अमेज़न पर पेपरबैक और ई-बुक दोनों रूपों में उपलब्ध है। कहा कि पाठक मेरी वेबसाइट और फेसबुक के माध्यम से भी मुझसे जुड़ सकते हैं।
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