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सकरा पुलिस का खेल: सूचक व उसके भाई काे बनाया अभियुक्त

संतोष कुमार झा/ मुजफ्फरपुर (बिहार)। पुलिस की मिली भगत से जिले में शराब के धंधा काे लेकर शुरू से सवाल उठता रहा है। कई थानेदार और  पुलिसकर्मी इसकाे लेकर आरोपी  बन चुके हैं। मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिले में थाने से शराब बेचे जाने का भी मामला सामने आ चुका है। ऐसे में इन दिनाें सकरा थाने की पुलिस सुर्खियाें में है। इस थाने की पुलिस शराब की सूचना देने वाले काे ही शराब तस्करी का आरोपी बनाकर मामला दर्ज कर रही है।

ताजा मामला सकरा थाने के काेरिगामा गांव की है। यहां के रहिवासी अनिल महताे ने शराब की सूचना विशेष शाखा की पुलिस काे दी थी। अनिल का कहना है कि सकरा थाने की पुलिस स्थानीय शराब तस्कराें से मिली हुई थी। इसलिए विशेष शाखा काे जानकारी दी थी। ताकि ऊपरी स्तर से कार्रवाई हाेगी। अनिल ने बताया कि शराब तस्कर के भाई की दुकान के बगल में ही शराब तस्कराें ने शराब स्टाेर कर रखा था। विशेष शाखा की सूचना पर सकरा थानेदार राजेश कुमार थाने के एएसआई राम उदय शर्मा व दिनेश कुमार के साथ पुलिस टीम काे छापेमारी के लिए भेजा।

विशेष शाखा की रिपाेर्ट पर पटना मद्य निषेध विभाग की टीम 12 जून काे सकरा थाने पहुंची। इसके बाद कोरिगामा में असल शराब तस्कर के ठिकाने पर दुबारा छापेमारी की गई। इस बार राम प्रवेश मिश्रा उर्फ चुनचुन के ठिकाने से 45 लीटर शराब जब्त हुई।इधर, अनिल महताे ने डीजीपी काे ज्ञापन देकर बताया है कि सकरा पुलिस ने तस्कराें से 2 लाख रुपए लेकर सूचना देने वाले का ही केस में नाम रख देने का साैदा किया। डीजीपी से की गई इस शिकायत की जांच का निर्देश मद्य निषेध विभाग काे दी गई है।

पुलिस टीम ने 72 कार्टन से अधिक शराब जब्त की लेकिन मुख्य शराब तस्कराें काे आरोपी बनाने के बजाय केस में सूचना देने वाले अनिल महताे और उसके भाई उमेश महताे काे ही अाराेपी बना दिया। केस दर्ज हाेने के बाद जब इसकी जानकारी अनिल काे हुई। उसने विशेष शाखा के पदाधिकारी से शिकायत की कि सूचना देने वाले काे ही अभियुक्त बनवा दिया गया है। इस पूरी घटना की रिपाेर्ट विशेष शाखा से डीएम, एसएसपी एवं मुख्यालय काे अवगत कराया गया है। मद्य निषेध विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। मुख्यालय इसकी जांच शुरू कर दी है।

शराब की सूचना देने वाले काे ही अभियुक्त बनाया जाना गलत है। सूचना देने वाले काे परेशान नहीं किया जाना है। इस संबंध में एसएसपी से बात करूंगा। – डाॅ. चंद्रशेखर सिंह, जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर

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